इंदौर में दूषित पानी का कहर: 7 की मौत, 110 अस्पताल में भर्ती; ‘सबसे स्वच्छ शहर’ में स्वास्थ्य आपातकाल

इंदौर में दूषित पानी का कहर

इंदौर में दूषित पानी का कहर: 7 की मौत, 110 अस्पताल में भर्ती; ‘सबसे स्वच्छ शहर’ में स्वास्थ्य आपातकाल:

इंदौर: देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा हासिल करने वाले इंदौर में इन दिनों ‘जहरीले पानी’ ने हाहाकार मचा रखा है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सोमवार को डायरिया के 38 नए मामले सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। वर्तमान में 110 मरीज विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन हैं, जिनमें से 15 की हालत गंभीर बताई जा रही है और वे आईसीयू (ICU) में भर्ती हैं।

सीवेज और पेयजल पाइपलाइन का मिलन बना ‘काल’

प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले और प्रशासनिक लापरवाही की पराकाष्ठा हैं। बताया जा रहा है कि एक पुलिस चौकी के पास पेयजल की मुख्य पाइपलाइन के ठीक ऊपर बिना सेफ्टी टैंक के शौचालय का निर्माण कर दिया गया था। पाइपलाइन में रिसाव (Leakage) होने के कारण शौचालय का गंदा पानी पेयजल में मिल गया, जिसे पीने से पूरा इलाका संक्रमण की चपेट में आ गया।

महामारी घोषित, जांच में जुटे राष्ट्रीय संस्थान

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने इसे क्षेत्रीय महामारी घोषित कर दिया है। कोलकाता स्थित ‘नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन बैक्टीरियल इन्फेक्शन्स’ (NIRBI) और ICMR की टीमें इंदौर पहुँच चुकी हैं।

  • प्रमुख लक्षण: मरीजों में ई-कोलाई (E. coli) और विब्रियो कोलेरी जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं।
  • बच्चों पर असर: दो बच्चों में हैजा की पुष्टि हुई है, जिनका इलाज चाचा नेहरू अस्पताल में चल रहा है।

प्रशासनिक कार्रवाई और राहत कार्य

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना को ‘इमरजेंसी’ करार देते हुए मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख के मुआवजे का ऐलान किया है। लापरवाही बरतने के आरोप में नगर निगम आयुक्त समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित या हटा दिया गया है।

  • इलाके में 200 स्वास्थ्य टीमें डोर-टू-डोर सर्वे कर रही हैं।
  • अब तक 2,700 से अधिक घरों का सर्वेक्षण किया जा चुका है और जल शुद्धिकरण किट बांटी गई हैं।
  • प्रभावित क्षेत्र में पानी की सप्लाई बंद कर 30 से अधिक टैंकरों के जरिए साफ पानी पहुँचाया जा रहा है।

स्वच्छता रैंकिंग पर सवाल

लगातार आठ वर्षों से स्वच्छता में नंबर-1 रहने वाले शहर में इस तरह की बुनियादी खामी ने शहरी नियोजन और भूमिगत बुनियादी ढांचे पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जल संरक्षणवादी राजेंद्र सिंह ने इसे “व्यवस्था द्वारा निर्मित आपदा” बताया है।