भारत को दोहरा झटका: ट्रम्प ने रूसी तेल पर 500% टैरिफ बिल को दी मंजूरी, ISA से भी पीछे हटा अमेरिका:
विशेष रिपोर्ट | नई दिल्ली/वॉशिंगटन 8 जनवरी, 2026
भारत और अमेरिका के कूटनीतिक गलियारों में आज उस वक्त खलबली मच गई, जब व्हाइट हाउस ने नई दिल्ली को प्रभावित करने वाले दो बेहद कड़े फैसलों की घोषणा की। नवनियुक्त अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के भारत आगमन से ठीक पहले, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को धार देते हुए रूसी तेल आयात पर भारी दंड और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) से हटने के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
1. रूसी तेल पर ‘टैरिफ वॉर’: क्या भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा दबाव?
रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने ‘रूस प्रतिबंध अधिनियम 2025’ को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह कानून उन देशों के लिए खतरे की घंटी है जो यूक्रेन युद्ध के बावजूद रूस से ऊर्जा व्यापार जारी रखे हुए हैं।
- 500% की भारी मार: इस कानून के तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों के उत्पादों पर अमेरिका में 500% तक का दंडात्मक आयात शुल्क (Tariff) लगाया जा सकता है।
- रणनीतिक घेराबंदी: अमेरिका का स्पष्ट लक्ष्य रूस के राजस्व स्रोतों को सुखाना है। भारत, चीन और ब्राजील जैसे बड़े खरीदार अब सीधे तौर पर अमेरिकी व्यापारिक प्रतिबंधों की रडार पर हैं।
- मौजूदा स्थिति: जानकारों का मानना है कि भारतीय निर्यात पहले से ही दबाव में है, और यह नया टैरिफ भारतीय व्यापार घाटे को और बढ़ा सकता है।
2. ‘इंटरनेशनल सोलर अलायंस’ से अमेरिका का किनारा
भारत के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) को एक बड़ा झटका देते हुए अमेरिका ने इस मंच से अपनी सदस्यता वापस ले ली है। 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के सहयोग से शुरू हुए इस संगठन का मुख्यालय गुरुग्राम (भारत) में है।
“हम उन संगठनों पर अमेरिकी करदाताओं का पैसा खर्च नहीं करेंगे जो हमारे राष्ट्रीय हितों के अनुरूप नहीं हैं।” — व्हाइट हाउस प्रेस विज्ञप्ति
व्हाइट हाउस ने इसे अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की ‘सफाई’ करार दिया है। अमेरिका का तर्क है कि वह उन 60 से अधिक संगठनों को छोड़ रहा है जो उनकी नजर में निष्प्रभावी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक स्तर पर अक्षय ऊर्जा के प्रयासों और भारत की जलवायु नेतृत्व की छवि पर असर पड़ सकता है।
3. नए राजदूत का ‘अल्टीमेटम’ और भारत की चुनौती
अमेरिका के नवनियुक्त राजदूत सर्जियो गोर, जो 12 जनवरी को दिल्ली पहुँच रहे हैं, एक कड़ा संदेश लेकर आ रहे हैं। उनके कार्यभार संभालने से पहले ही यह स्पष्ट कर दिया गया है कि भारत को रूसी तेल की खरीद को शून्य पर लाना होगा।
भारत का रुख: भारत अब तक अपनी “रणनीतिक स्वायत्तता” पर कायम है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हालांकि, सर्जियो गोर की ताजपोशी और इन नए कानूनों के बाद भारत को अपनी विदेश नीति और व्यापारिक संतुलन बनाए रखने के लिए एक कठिन परीक्षा से गुजरना होगा।
मुख्य बिंदु एक नजर में:
| मुद्दा | अमेरिकी कदम | भारत पर प्रभाव |
| रूसी तेल | 500% तक टैरिफ का प्रावधान | निर्यात में कमी और व्यापारिक तनाव |
| ISA | गठबंधन से पूर्ण वापसी | सौर ऊर्जा निवेश में कमी की आशंका |
| राजदूत नीति | ‘नो रूस ऑयल’ का सख्त संदेश | कूटनीतिक दबाव में वृद्धि |






