डोनाल्ड ट्रंप की ‘ग्रीनलैंड’ जिद:
भूमिका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बेबाक और चौंकाने वाले फैसलों के कारण वैश्विक सुर्खियों में हैं। इस बार मुद्दा है—ग्रीनलैंड (Greenland)। ट्रंप ने न केवल ग्रीनलैंड को खरीदने की अपनी पुरानी इच्छा को दोहराया है, बल्कि उन देशों को भी कड़ी चेतावनी दी है जो उनकी इस योजना के रास्ते में आ रहे हैं। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि जो देश इस रणनीतिक योजना का समर्थन नहीं करेंगे, उन्हें भारी टैरिफ (Import Tariffs) और आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।
1. क्या है ट्रंप की ग्रीनलैंड योजना? (Understanding the Greenland Plan)
ग्रीनलैंड, जो भौगोलिक रूप से उत्तरी अमेरिका का हिस्सा है लेकिन राजनीतिक रूप से डेनमार्क (Denmark) के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है, लंबे समय से ट्रंप की नजरों में है।
- रणनीतिक महत्व: आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए ट्रंप ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाना चाहते हैं।
- संसाधनों का खजाना: ग्रीनलैंड में दुर्लभ खनिज (Rare Earth Minerals), कोयला, लोहा और गैस के विशाल भंडार मौजूद हैं, जो भविष्य की तकनीक और ऊर्जा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- सैन्य आधार: यहाँ स्थित ‘थ्यूल एयर बेस’ (Thule Air Base) अमेरिका के लिए मिसाइल डिफेंस सिस्टम का एक मुख्य केंद्र है।
2. ट्रंप की ‘टैरिफ चेतावनी‘ और आर्थिक दबाव
ट्रंप की कार्यशैली हमेशा से ‘अमेरिका फर्स्ट’ (America First) की रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है, “जो देश हमारी सुरक्षा और रणनीतिक हितों के साथ नहीं चलेंगे, उन्हें अमेरिकी बाजार में व्यापार करने के लिए बड़ी कीमत चुकानी होगी।”
टैरिफ का खतरा किन पर है?
- डेनमार्क: चूंकि डेनमार्क ने ग्रीनलैंड को बेचने से साफ इनकार कर दिया है, इसलिए ट्रंप ने डेनिश उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाने के संकेत दिए हैं।
- यूरोपीय संघ (EU): यदि यूरोपीय देश डेनमार्क के समर्थन में खड़े होते हैं, तो ट्रंप पूरे ब्लॉक पर व्यापारिक प्रतिबंध लगा सकते हैं।
- चीन और रूस: ट्रंप का मानना है कि ग्रीनलैंड को अमेरिका के पास होना चाहिए ताकि चीन वहां अपनी ‘पोलर सिल्क रोड’ न बना सके।
3. डेनमार्क और ग्रीनलैंड की प्रतिक्रिया: “यह बिकाऊ नहीं है”
डेनमार्क की सरकार ने ट्रंप के इस प्रस्ताव को ‘हास्यास्पद’ (Absurd) करार दिया है। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने भी स्पष्ट किया है कि ग्रीनलैंड व्यापार के लिए खुला है, लेकिन बिक्री के लिए नहीं।
तनाव के मुख्य बिंदु:
- संप्रभुता का मुद्दा: डेनमार्क इसे अपनी क्षेत्रीय अखंडता पर हमला मानता है।
- राजनयिक संकट: ट्रंप ने इस विवाद के चलते पहले भी डेनमार्क की अपनी आधिकारिक यात्रा रद्द कर दी थी, जो अब फिर से एक बड़े कूटनीतिक संकट में बदल रही है।

4. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर: क्या फिर लौटेगा मंदी का दौर?
यदि ट्रंप टैरिफ की धमकी को हकीकत में बदलते हैं, तो वैश्विक शेयर बाजार (Global Stock Markets) में अस्थिरता आ सकती है।
- सप्लाई चेन में बाधा: अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापारिक युद्ध से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी सेक्टर को भारी नुकसान हो सकता है।
- मुद्रास्फीति (Inflation): टैरिफ लगने से आयातित वस्तुएं महंगी होंगी, जिससे अमेरिका के भीतर भी महंगाई बढ़ सकती है।
5. भारत पर प्रभाव: अवसर या चुनौती? (Impact on India)
भारत के लिए यह स्थिति एक ‘दोधारी तलवार’ की तरह है।
- व्यापारिक अवसर: यदि अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक युद्ध छिड़ता है, तो भारत को अपने निर्यात (Exports) बढ़ाने का मौका मिल सकता है।
- रणनीतिक संतुलन: भारत के अमेरिका और डेनमार्क दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं। ऐसे में भारत को कूटनीतिक स्तर पर बहुत संभलकर चलना होगा।
- कच्चे तेल और ऊर्जा: वैश्विक अस्थिरता से तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
6. आर्कटिक की नई जंग: रूस और चीन की भूमिका
ग्रीनलैंड सिर्फ एक द्वीप नहीं है, बल्कि आर्कटिक पर कब्जे की चाबी है। रूस अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा रहा है और चीन खुद को ‘नियर-आर्कटिक स्टेट’ घोषित कर चुका है। ट्रंप की टैरिफ धमकी असल में इन दोनों शक्तियों को ग्रीनलैंड से दूर रखने की एक सोची-समझी चाल है।
7. विशेषज्ञों का विश्लेषण: ट्रंप की रणनीति सफल होगी?
जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप ‘टैरिफ’ को एक सौदेबाजी के हथियार (Bargaining Chip) के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका उद्देश्य शायद ग्रीनलैंड को पूरी तरह खरीदना न होकर, वहां अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को और अधिक मजबूत करना या वहां के संसाधनों पर नियंत्रण प्राप्त करना है।
8. निष्कर्ष: 2026 की सबसे बड़ी आर्थिक चुनौती
डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड योजना और टैरिफ की धमकी ने यह साबित कर दिया है कि 2026 में वैश्विक राजनीति ‘शक्ति और संसाधनों’ के इर्द-गिर्द ही घूमेगी। डेनमार्क के साथ शुरू हुआ यह विवाद जल्द ही एक बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट का रूप ले सकता है। क्या ट्रंप की यह ‘बिज़नेस डील’ सफल होगी या यह केवल एक और व्यापारिक युद्ध की शुरुआत है? यह आने वाला समय ही बताएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):
- प्रश्न: क्या अमेरिका ग्रीनलैंड को जबरदस्ती खरीद सकता है?
- उत्तर: अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, किसी देश के हिस्से को बिना उसकी सहमति के खरीदा नहीं जा सकता।
- प्रश्न: टैरिफ क्या होता है?
- उत्तर: यह एक प्रकार का टैक्स है जो आयातित वस्तुओं पर लगाया जाता है ताकि विदेशी सामान महंगा हो जाए।
- प्रश्न: ग्रीनलैंड इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
- उत्तर: इसकी रणनीतिक स्थिति और वहां छिपे दुर्लभ खनिजों के कारण यह वैश्विक शक्तियों के आकर्षण का केंद्र है।






