भूमिका:
देश की सबसे अमीर महानगरपालिका, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के 2026 के चुनाव परिणामों ने महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा बदल दी है। शुक्रवार को घोषित हुए नतीजों में भाजपा-शिवसेना (महायुति) गठबंधन ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। मुंबई, जिसे दशकों से शिवसेना (अविभाजित) और ठाकरे परिवार का गढ़ माना जाता था, वहां अब कमल और धनुष-बाण (शिंदे गुट) की लहर दिखाई दे रही है।
1. फाइनल टैली: भाजपा बनी सबसे बड़ी पार्टी (Final Seat Count)
मुंबई की सभी 227 सीटों के परिणाम घोषित हो चुके हैं। इस बार के नतीजों ने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
| राजनीतिक दल / गठबंधन | जीती गई सीटें |
| भारतीय जनता पार्टी (BJP) | 89 |
| शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) | 29 |
| शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे – UBT) | 65 |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) | 24 |
| अन्य (MNS, AIMIM, SP, NCP) | 20 |
कुल सीटें: 227 | बहुमत का आंकड़ा: 114
2. महायुति की जीत के 3 बड़े मायने
भाजपा और शिंदे सेना की महायुति ने कुल मिलाकर 118 सीटें हासिल की हैं, जो बहुमत के आंकड़े (114) से 4 अधिक है।
- ठाकरे किले में सेंध: 1997 के बाद यह पहली बार है जब ठाकरे परिवार के नेतृत्व वाली शिवसेना बीएमसी की सत्ता से बाहर हुई है।
- मराठी कार्ड बनाम विकास: शिंदे गुट और भाजपा ने ‘विकास और हिंदुत्व’ के मुद्दे पर चुनाव लड़ा, जिसे मुंबई की जनता ने स्वीकार किया।
- भाजपा का बढ़ता ग्राफ: 89 सीटों के साथ भाजपा अब मुंबई की निर्विवाद रूप से सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति बन गई है।
3. शिवसेना (UBT) का प्रदर्शन: हार में भी संघर्ष
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) को 65 सीटें मिली हैं। हालांकि वे सत्ता से दूर रह गए, लेकिन उन्होंने मध्य मुंबई और मराठी बहुल इलाकों (जैसे दादर, परेल, लालबाग) में अपनी पकड़ बनाए रखी है। पार्टी अब बीएमसी में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभाएगी।
4. मुंबई का अगला मेयर कौन होगा?
बहुमत मिलने के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि मुंबई का अगला मेयर (Mayor of Mumbai) कौन होगा।
- भाजपा का दावा: सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा अपने किसी वरिष्ठ पार्षद को मेयर बनाना चाहती है।
- शिंदे गुट की मांग: एकनाथ शिंदे की शिवसेना का तर्क है कि ‘मराठी अस्मिता’ को देखते हुए मेयर का पद उनके खाते में जाना चाहिए।
- रिजर्वेशन का पेंच: मेयर पद का चयन लॉटरी के जरिए होने वाले ‘आरक्षण’ पर भी निर्भर करेगा।
5. छोटे दलों का हाल: MNS और AIMIM का असर
- राज ठाकरे की MNS: मनसे को केवल 6 सीटें मिली हैं, जो उनकी उम्मीदों से काफी कम है।
- AIMIM और सपा: ओवैसी की पार्टी ने 8 सीटें जीतकर मुस्लिम बहुल इलाकों में कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाई है।
- शरद पवार की NCP: शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी मुंबई में केवल 1 सीट तक सिमट कर रह गई है।
6. बीएमसी का विशाल बजट और जीत की अहमियत
बीएमसी का वार्षिक बजट ₹74,400 करोड़ से भी अधिक है, जो कई छोटे राज्यों के बजट से भी बड़ा है। यही कारण है कि इस चुनाव को ‘मिनी विधानसभा’ कहा जाता है। इस जीत के साथ महायुति के पास अब मुंबई के इंफ्रास्ट्रक्चर, कोस्टल रोड और विकास परियोजनाओं को सीधे नियंत्रित करने की शक्ति होगी।
निष्कर्ष (Conclusion)
बीएमसी चुनाव 2026 के परिणाम बताते हैं कि मुंबई की जनता ने ‘बदलाव’ को चुना है। जहां एक तरफ भाजपा ने अपनी सांगठनिक ताकत दिखाई है, वहीं दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे के लिए यह आत्ममंथन का समय है। आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए यह नतीजे एक ‘ट्रेलर’ की तरह देखे जा रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- प्रश्न: क्या भाजपा अकेले बीएमसी में मेयर बना सकती है?
- उत्तर: नहीं, भाजपा के पास 89 सीटें हैं, जबकि बहुमत के लिए 114 चाहिए। उन्हें एकनाथ शिंदे की शिवसेना (29 सीटें) के समर्थन की जरूरत होगी।
- प्रश्न: बीएमसी में बहुमत का आंकड़ा क्या है?
- उत्तर: 227 वार्डों वाली बीएमसी में बहुमत के लिए 114 पार्षदों का समर्थन अनिवार्य है।
- प्रश्न: इस चुनाव में वोटिंग प्रतिशत कितना रहा?
- उत्तर: मुंबई में इस बार कुल 52.94% मतदान दर्ज किया गया।






