दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक गुट का उदय: यूरोपीय संघ और मर्कोसुर के बीच ऐतिहासिक ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ संपन्न

यूरोपीय-संघ

भूमिका:

वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए साल 2026 की शुरुआत एक बड़ी खबर के साथ हुई है। दो दशकों से अधिक की बातचीत और कई उतार-चढ़ाव के बाद, यूरोपीय संघ (EU) और दक्षिण अमेरिकी देशों के समूह मर्कोसुर (Mercosur) ने अंततः एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह समझौता न केवल दुनिया के सबसे बड़े व्यापार क्षेत्रों में से एक का निर्माण करेगा, बल्कि यह वैश्विक भू-राजनीति और आर्थिक समीकरणों को भी पूरी तरह से बदल देगा।

1. क्या है EU-Mercosur समझौता? (The Big Picture)

यह समझौता यूरोप के 27 देशों और दक्षिण अमेरिका के प्रमुख देशों—अर्जेंटीना, ब्राजील, पैराग्वे और उरुग्वे—के बीच हुआ है।

  • बाजार का आकार: यह समझौता लगभग 780 मिलियन (78 करोड़) लोगों के बाजार को कवर करता है।
  • जीडीपी (GDP): संयुक्त रूप से, इन दोनों गुटों की जीडीपी वैश्विक अर्थव्यवस्था का लगभग 20% से अधिक हिस्सा है।
  • टैरिफ में कटौती: समझौते के तहत, यूरोपीय संघ मर्कोसुर से आने वाले 90% से अधिक उत्पादों पर टैरिफ (सीमा शुल्क) हटा देगा, और बदले में मर्कोसुर भी यूरोपीय सामानों के लिए अपना बाजार खोलेगा।

2. किन क्षेत्रों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा? (Beneficiary Sectors)

इस समझौते के लागू होने से दोनों पक्षों के प्रमुख उद्योगों में नई जान आएगी:

  • यूरोपीय संघ के लिए: यूरोप की ऑटोमोबाइल कंपनियां (जैसे फॉक्सवैगन, बीएमडब्ल्यू), मशीनरी उद्योग और वाइन उत्पादकों को दक्षिण अमेरिकी बाजारों में सीधी पहुंच मिलेगी। पहले यहाँ कारों पर 35% तक का भारी आयात शुल्क लगता था।
  • मर्कोसुर के लिए: दक्षिण अमेरिकी देशों के लिए कृषि क्षेत्र (Agriculture) सबसे बड़ा विजेता है। ब्राजील और अर्जेंटीना अब अपनी बीफ (Beef), सोयाबीन, चीनी और पोल्ट्री उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में अधिक मात्रा में और कम दाम पर बेच सकेंगे।

3. पर्यावरण और ‘अमेज़न’ का मुद्दा: समझौते की सबसे बड़ी चुनौती

इस समझौते में इतनी देरी क्यों हुई? इसका मुख्य कारण पर्यावरण संबंधी चिंताएं थीं।

  • डीफॉरेस्टेशन (Deforestation): यूरोपीय देशों (विशेषकर फ्रांस) को चिंता थी कि ब्राजील में खेती बढ़ाने के लिए अमेज़न के वर्षावनों को काटा जा सकता है।
  • पेरिस समझौता: नए समझौते में एक सख्त क्लॉज जोड़ा गया है, जिसके तहत दोनों पक्षों को पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्यों का पालन करना अनिवार्य होगा। यह पर्यावरण संरक्षण और व्यापार के बीच एक संतुलन बनाने का प्रयास है।

4. भारत पर क्या होगा इसका असर? (Impact on India)

वैश्विक स्तर पर इतने बड़े व्यापारिक गुट के बनने का असर भारत पर भी पड़ेगा:

  1. प्रतिस्पर्धा: भारत के कृषि निर्यात (जैसे चीनी और मांस) को यूरोपीय बाजार में मर्कोसुर के देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।
  2. सस्ता कच्चा माल: दक्षिण अमेरिका से आने वाला कच्चा माल भारत के लिए सस्ता हो सकता है यदि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बेहतर होती है।
  3. भारत-ईयू एफटीए की राह: यह समझौता भारत और यूरोपीय संघ के बीच चल रहे मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत को गति दे सकता है, क्योंकि भारत अब इस बड़े व्यापारिक ब्लॉक से पिछड़ना नहीं चाहेगा।

5. वैश्विक भू-राजनीति: चीन को टक्कर

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दक्षिण अमेरिका में चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए यूरोप की एक रणनीतिक चाल है। पिछले एक दशक में चीन ने लैटिन अमेरिका में भारी निवेश किया है। अब यह समझौता फिर से ‘ट्रांस-अटलांटिक’ संबंधों को मजबूत करेगा।

6. आर्थिक आंकड़े: एक नज़र में

विशेषताविवरण
कुल आबादी780 मिलियन
प्रमुख देश (EU)जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्पेन
प्रमुख देश (Mercosur)ब्राजील, अर्जेंटीना, पैराग्वे, उरुग्वे
मुख्य उत्पाद (निर्यात)कारें, वाइन, सोयाबीन, बीफ, मशीनरी

निष्कर्ष (Conclusion)

यूरोपीय संघ और मर्कोसुर के बीच हुआ यह समझौता वैश्विक व्यापार के नए युग की शुरुआत है। हालांकि, इसे पूरी तरह से लागू करने में अभी भी सदस्य देशों की संसदों से अनुमोदन (Ratification) की प्रक्रिया बाकी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि मुक्त व्यापार और बहुपक्षवाद (Multilateralism) की जीत हुई है। यह समझौता दुनिया को संदेश देता है कि आर्थिक मंदी की आहटों के बीच सहयोग ही विकास का एकमात्र रास्ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  • प्रश्न: मर्कोसुर (Mercosur) में कौन से देश शामिल हैं?
  • उत्तर: इसमें ब्राजील, अर्जेंटीना, पैराग्वे और उरुग्वे मुख्य सदस्य के रूप में शामिल हैं।
  • प्रश्न: इस समझौते से उपभोक्ताओं को क्या लाभ होगा?
  • उत्तर: प्रतिस्पर्धा बढ़ने और आयात शुल्क घटने से कारों, इलेक्ट्रॉनिक्स और खाद्य उत्पादों की कीमतों में कमी आने की संभावना है।
  • प्रश्न: क्या यह समझौता तुरंत लागू हो गया है?
  • उत्तर: नहीं, अभी हस्ताक्षर हुए हैं। अब सदस्य देशों की संसदों से औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद यह चरणबद्ध तरीके से लागू होगा।