नई दिल्ली/मुंबई: भारतीय कमोडिटी बाजार में आज एक ऐसा ऐतिहासिक दिन है जिसे निवेशक दशकों तक याद रखेंगे। MCX (Multi Commodity Exchange) पर चांदी की कीमतों ने पहली बार ₹3,00,000 प्रति किलोग्राम के जादुई और मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया है।
महज 9 महीने पहले जो चांदी ₹85,000 से ₹90,000 के दायरे में घूम रही थी, उसने आज 200% से अधिक का रिटर्न देकर निवेशकों को मालामाल कर दिया है। आज यानी 19 जनवरी 2026 को चांदी ने इंट्राडे में ₹3,01,315 का रिकॉर्ड स्तर छुआ।
चांदी में इस ‘तूफानी तेजी’ के 5 बड़े कारण (Why Silver Prices are Rising)
चांदी की कीमतों में आई यह तेजी कोई इत्तेफाक नहीं है। इसके पीछे वैश्विक राजनीति से लेकर तकनीकी बदलाव तक कई गहरे कारण छिपे हैं:
1. डोनाल्ड ट्रम्प और ‘ग्रीनलैंड टैरिफ’ विवाद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ग्रीनलैंड मुद्दे पर यूरोपीय देशों (जैसे फ्रांस, जर्मनी और यूके) पर लगाए गए नए टैरिफ (Tariffs) की धमकी ने दुनिया भर के बाजारों में डर पैदा कर दिया है। जब भी वैश्विक व्यापार युद्ध (Trade War) की स्थिति बनती है, निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए सोने और चांदी की ओर भागते हैं।
2. औद्योगिक मांग में ‘विस्फोट’ (Industrial Demand Surge)
चांदी अब केवल गहनों तक सीमित नहीं है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) की बैटरी और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) डेटा सेंटर्स में चांदी का बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है।
- सोलर एनर्जी: एक सोलर पैनल में लगभग 20 ग्राम चांदी का उपयोग होता है। भारत के 500 GW रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्य ने मांग को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
- EV बैटरियां: अगली पीढ़ी की सिल्वर-कार्बन बैटरियां तेजी से लिथियम-आयन की जगह ले रही हैं।
3. वैश्विक आपूर्ति में भारी कमी (Supply Deficit)
लगातार पांचवें साल चांदी की वैश्विक आपूर्ति मांग की तुलना में कम रही है। मैक्सिको और पेरू जैसे बड़े उत्पादक देशों में माइनिंग बाधाओं के कारण नया स्टॉक बाजार में नहीं आ पा रहा है, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।
4. रुपया बनाम डॉलर का खेल
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कमजोरी ने घरेलू बाजार में चांदी को और महंगा कर दिया है। चूंकि भारत अपनी चांदी का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में छोटी सी तेजी भी भारत में बड़ी उछाल बन जाती है।
5. चांदी अब ‘स्मार्ट निवेशकों’ की पसंद
सालों तक ‘गरीबों का सोना’ कही जाने वाली चांदी अब बड़े पोर्टफोलियो का हिस्सा है। Silver ETFs में आए भारी निवेश ने इसकी लिक्विडिटी और डिमांड दोनों को बढ़ा दिया है।
चांदी का ऐतिहासिक सफर: 9 महीने का विश्लेषण
नीचे दी गई तालिका दिखाती है कि कैसे चांदी ने पिछले कुछ महीनों में रफ्तार पकड़ी:
| समय सीमा | चांदी का अनुमानित भाव (प्रति किलो) | वृद्धि (%) |
| अप्रैल 2025 | ₹92,000 | – |
| जुलाई 2025 | ₹1,45,000 | ~57% |
| अक्टूबर 2025 | ₹1,88,000 | ~104% |
| जनवरी 2026 (आज) | ₹3,05,000* | ~231% |
*कीमतें स्थानीय टैक्स और शहरों के अनुसार भिन्न हो सकती हैं।
एक्सपर्ट्स की राय: क्या ₹4 लाख का लक्ष्य संभव है? (Silver Price Prediction 2026)
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह तो बस शुरुआत है।
- मोतीलाल ओसवाल (Motilal Oswal): दिग्गज ब्रोकरेज फर्म ने चांदी के लिए ₹3.20 लाख का तत्काल लक्ष्य रखा है। उनके अनुसार, यदि भू-राजनीतिक तनाव जारी रहता है, तो साल के अंत तक हम ₹3.50 लाख का स्तर देख सकते हैं।
- SAMCO सिक्योरिटीज: तकनीकी चार्ट्स के आधार पर फिबोनाची एक्सटेंशन (Fibonacci extensions) की ओर इशारा करते हुए विशेषज्ञों ने ₹3.94 लाख तक की संभावना जताई है।
निवेशकों के लिए सलाह: अभी खरीदें या इंतजार करें?
यदि आप चांदी में निवेश की योजना बना रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:
- Buy on Dips: इतनी बड़ी तेजी के बाद बाजार में छोटी गिरावट (Correction) आना स्वाभाविक है। ₹2.70 लाख से ₹2.80 लाख के बीच किसी भी गिरावट को खरीदारी का मौका समझें।
- ETF के जरिए निवेश: फिजिकल चांदी रखने के बजाय Silver ETF या Digital Silver एक सुरक्षित और आसान विकल्प है।
- लंबी अवधि का नजरिया: चांदी एक ‘वोलाटाइल’ (अस्थिर) कमोडिटी है। इसमें कम से कम 1-3 साल के लिए निवेश करना ही समझदारी है।
निष्कर्ष
चांदी ने आज ₹3 लाख का आंकड़ा पार कर अपनी ‘कीमती’ धातु की साख को और मजबूत किया है। औद्योगिक मांग और सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की बढ़ती जरूरत इसे 2026 की सबसे बेहतरीन एसेट क्लास बना रही है। हालांकि, छोटे निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए और एक साथ सारा पैसा लगाने के बजाय किस्तों में निवेश करना चाहिए।






