बुधवार, 21 जनवरी 2026: स्विट्जरलैंड के बर्फीले शहर दावोस (Davos) में आयोजित ‘विश्व आर्थिक मंच’ (World Economic Forum) की बैठक इस बार किसी बिजनेस समिट जैसी नहीं, बल्कि युद्ध के मैदान जैसी नजर आ रही है। पूरी दुनिया की नजरें ग्रीनलैंड संकट (Greenland Crisis) पर टिकी हैं, जिसने अमेरिका और यूरोप के बीच दशकों पुराने रिश्तों में दरार डाल दी है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ‘ग्रीनलैंड खरीद’ की जिद अब एक सैन्य और व्यापारिक महायुद्ध (Global Trade War) की ओर बढ़ रही है। आइए जानते हैं दावोस में आज क्या-क्या हुआ और ग्रीनलैंड के पीएम ने अपने नागरिकों को “अमेरिकी आक्रमण” के लिए तैयार रहने को क्यों कहा।
1. मैक्रों का ‘बुलीज’ को करारा जवाब: “यूरोप झुकेगा नहीं”
दावोस के मंच पर आज उस समय तनाव चरम पर पहुंच गया जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) ने ट्रम्प की धमकियों का सामना किया। हाल ही में ट्रम्प ने घोषणा की थी कि अगर फ्रांस उनके “बोर्ड ऑफ पीस” (Board of Peace) में शामिल नहीं होता और ग्रीनलैंड मामले में अमेरिका का विरोध बंद नहीं करता, तो वे फ्रेंच वाइन (Wine) और शैंपेन पर 200% टैरिफ लगा देंगे।
मैक्रों ने आज बिना नाम लिए ट्रम्प पर निशाना साधते हुए कहा:
“यूरोप अब किसी ‘बुली’ (धौंस दिखाने वाले) के आगे नहीं झुकेगा। हम अंतरराष्ट्रीय कानूनों और अपनी संप्रभुता का सम्मान करते हैं। टैरिफ के जरिए ब्लैकमेल करना आधुनिक कूटनीति नहीं, बल्कि तानाशाही है।”

2. ग्रीनलैंड के पीएम की चेतावनी: “आक्रमण के लिए तैयार रहें”
सबसे चौंकाने वाली खबर ग्रीनलैंड की राजधानी नूक (Nuuk) से आई। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक निल्सन (Jens-Frederik Nielsen) ने एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने नागरिकों को चेतावनी दी है कि वे “संभावित अमेरिकी सैन्य आक्रमण” के लिए खुद को तैयार रखें।
पीएम निल्सन ने कहा कि हालांकि वे शांति चाहते हैं, लेकिन ट्रम्प की हालिया बयानबाजी और उनके द्वारा शेयर की गई AI तस्वीरें (जिसमें ट्रम्प ग्रीनलैंड पर अमेरिकी झंडा गाड़ रहे हैं) को हल्के में नहीं लिया जा सकता। सरकार ने नागरिकों को कम से कम 5 दिनों का राशन स्टॉक करने की सलाह दी है।
3. ‘ट्रेड बाज़ूका’ (Trade Bazooka) और 200% टैरिफ का गणित
ट्रम्प की रणनीति केवल सैन्य धमकी तक सीमित नहीं है, वह आर्थिक हथियारों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
- वाइन पर 200% टैरिफ: फ्रांस के लिए यह एक बड़ा आर्थिक झटका हो सकता है क्योंकि अमेरिका फ्रेंच वाइन का सबसे बड़ा खरीदार है।
- यूरोपीय संघ का पलटवार: यूरोपीय संघ (EU) ने अपनी ‘ट्रेड बाज़ूका’ पॉलिसी को सक्रिय करने की धमकी दी है। इसके तहत अमेरिका से आने वाली टेक सेवाओं और ऑटोमोबाइल पर भारी टैक्स लगाया जा सकता है।
4. ट्रम्प की ‘गोल्डन डोम’ जिद और ग्रीनलैंड का महत्व
आखिर ट्रम्प ग्रीनलैंड के पीछे क्यों पड़े हैं? इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
- रणनीतिक सुरक्षा (Golden Dome Shield): ट्रम्प का मानना है कि आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन को रोकने के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जा जरूरी है।
- प्राकृतिक संसाधन: बर्फ पिघलने के साथ ही ग्रीनलैंड में छिपे दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) और तेल के भंडारों पर अमेरिका की नजर है।
- विरासत (Legacy): ट्रम्प इसे 1959 के बाद अमेरिकी क्षेत्र के सबसे बड़े विस्तार के रूप में देख रहे हैं।
5. भारत पर क्या होगा असर?
भले ही यह संकट सात समंदर पार हो रहा है, लेकिन इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
- शेयर बाजार में हलचल: आज सेंसेक्स में 1000 अंकों की गिरावट इसी अनिश्चितता का परिणाम है।
- डॉलर की मजबूती: वैश्विक तनाव के कारण डॉलर मजबूत हो सकता है, जिससे भारतीय रुपया कमजोर होगा और आयात महंगा हो जाएगा।
- क्रूड ऑयल: अगर आर्कटिक क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
निष्कर्ष: क्या कूटनीति बचा पाएगी दुनिया को?
दावोस 2026 केवल आर्थिक चर्चा का मंच नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक व्यवस्था के टूटने का प्रतीक बन गया है। एक तरफ ट्रम्प की “अमेरिका फर्स्ट” नीति है, तो दूसरी तरफ यूरोप की अपनी संप्रभुता बचाने की जंग। क्या आने वाले हफ्तों में हम दुनिया का सबसे बड़ा व्यापार युद्ध देखेंगे? या डेनमार्क और अमेरिका के बीच कोई गुप्त समझौता होगा?
FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. क्या अमेरिका वाकई ग्रीनलैंड पर हमला कर सकता है?
विशेषज्ञ इसे एक ‘हाइब्रिड वॉरफेयर’ और दबाव बनाने की रणनीति मान रहे हैं, लेकिन सैन्य टकराव की आशंका से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।
Q2. 200% टैरिफ से आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
इससे लग्जरी सामान, दवाएं और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण महंगे हो सकते हैं, क्योंकि ग्लोबल सप्लाई चेन एक-दूसरे से जुड़ी हुई है।
Q3. ग्रीनलैंड का मालिक कौन है?
ग्रीनलैंड वर्तमान में डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत्त हिस्सा है। इसकी सुरक्षा और विदेश नीति डेनमार्क देखता है।






