दावोस/नई दिल्ली | 24 जनवरी 2026: वैश्विक राजनीति और व्यापार के गलियारों से भारत के लिए एक राहत भरी खबर आ रही है। स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दौरान अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेेंट ने संकेत दिया है कि अमेरिका जल्द ही भारत पर लगाए गए 25% अतिरिक्त दंडात्मक टैरिफ (Punitive Tariffs) को वापस ले सकता है।
बेसेेंट का यह बयान उस समय आया है जब भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूसी तेल के आयात में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि उनके टैरिफ के दबाव ने अपना काम कर दिया है।
क्या है पूरा मामला? क्यों लगा था 25% अतिरिक्त बोझ?
अगस्त 2025 में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर कुल 50% टैरिफ लगा दिए थे। इसमें से 25% पारस्परिक टैरिफ थे, जबकि शेष 25% अतिरिक्त शुल्क विशेष रूप से भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने के विरोध में लगाए गए थे।
अमेरिका का तर्क था कि भारत रूसी तेल खरीदकर पुतिन की “युद्ध मशीन” (War Machine) को फंड कर रहा है। हालांकि, भारत ने हमेशा अपने ‘इंडिया फर्स्ट’ रुख को कायम रखा और अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
स्कॉट बेसेेंट का ‘सफलता’ का दावा
दावोस में मीडिया से बात करते हुए बेसेेंट ने कहा:
“हमने भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए 25% टैरिफ लगाए थे, और अब भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूसी तेल की खरीद लगभग धराशायी (Collapse) हो गई है। यह एक बड़ी सफलता है। अब इन टैरिफ को हटाने का रास्ता खुल गया है।”
रूसी तेल आयात में कितनी आई कमी?
आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर 2025 में भारत का रूसी तेल (Urals Crude) का आयात गिरकर 9.29 लाख बैरल प्रति दिन (bpd) रह गया है, जो कि दिसंबर 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है।
- 2024 का औसत: 13.6 लाख bpd
- 2025 का औसत: 12.7 लाख bpd
- वर्तमान स्थिति: भारी गिरावट।
भारतीय रिफाइनरियों ने अब अपना ध्यान मध्य पूर्व (Middle East), पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की ओर स्थानांतरित कर दिया है। हालांकि यह तेल रूस के मुकाबले थोड़ा महंगा है, लेकिन अमेरिकी टैरिफ के डर और सख्त प्रतिबंधों ने भारत को विकल्प तलाशने पर मजबूर किया है।
यूरोप पर स्कॉट बेसेेंट का तीखा हमला
हैरानी की बात यह है कि जहां बेसेेंट ने भारत की सराहना की, वहीं उन्होंने यूरोपीय देशों को “पाखंडी” बताया। उन्होंने कहा कि यूरोप के देश भारत से रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद खरीद रहे हैं, जो असल में रूसी कच्चे तेल से बना है।
“यूरोपीय देश खुद के खिलाफ युद्ध को ही फंड कर रहे हैं। यह विडंबना और मूर्खता की पराकाष्ठा है,” बेसेेंट ने तंज कसते हुए कहा।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (Trade Deal) के लिए क्या हैं मायने?
यह बयान भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकता है।
- निर्यात को मजबूती: अगर 25% टैरिफ हटते हैं, तो भारतीय इंजीनियरिंग सामान, कपड़ा और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए अमेरिकी बाजार फिर से प्रतिस्पर्धी हो जाएगा।
- BCCI और IPL कनेक्शन: हाल के दिनों में बांग्लादेश के साथ उपजे विवाद और क्रिकेट डिप्लोमेसी के बीच, यह आर्थिक खबर भारत के हाथ मजबूत करती है।
- प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप की दोस्ती: खुद ट्रंप ने भी दावोस में मनीकंट्रोल को दिए इंटरव्यू में पीएम मोदी को अपना “शानदार दोस्त” बताया है, जिससे एक ‘ग्रैंड ट्रेड डील’ की उम्मीदें और बढ़ गई हैं।
निष्कर्ष: कूटनीति की जीत?
रुपये की हालिया गिरावट (₹91.73 प्रति डॉलर) के बीच, टैरिफ में संभावित कटौती भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। यदि भारत रूसी तेल आयात में अपनी कटौती जारी रखता है, तो फरवरी 2026 तक हमें टैरिफ हटने का आधिकारिक आदेश देखने को मिल सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. क्या भारत ने रूस से तेल खरीदना पूरी तरह बंद कर दिया है?
आधिकारिक तौर पर नहीं, लेकिन आंकड़ों के अनुसार इसमें भारी गिरावट आई है। भारतीय रिफाइनर अब अन्य देशों से विकल्प तलाश रहे हैं।
Q2. क्या भारत पर अब भी 50% टैरिफ लागू हैं?
हाँ, फिलहाल 50% टैरिफ लागू हैं, लेकिन अमेरिकी वित्त सचिव के बयान के बाद 25% की कटौती की संभावना प्रबल हो गई है।
Q3. भारत के निर्यात पर इसका क्या असर होगा?
टैरिफ कम होने से अमेरिका को होने वाला भारतीय निर्यात सस्ता होगा, जिससे IT, टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को सीधा लाभ होगा।






