नई दिल्ली | 27 जनवरी 2026: भारत के आर्थिक इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने आधिकारिक तौर पर भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा कर दी है। यह समझौता न केवल 2 अरब लोगों के बाजार को एक साथ लाता है, बल्कि वैश्विक जीडीपी के 25% हिस्से का प्रतिनिधित्व भी करता है।
क्यों है यह ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’?
इस समझौते को ऐतिहासिक इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि:
- 18 साल की बातचीत: 2007 में शुरू हुई यह बातचीत कई उतार-चढ़ाव के बाद आज मुकाम पर पहुंची है।
- टैरिफ में भारी कटौती: भारत और ईयू ने 90% से अधिक वस्तुओं पर आयात शुल्क (Tariffs) खत्म करने या कम करने पर सहमति जताई है।
- 2 अरब का बाजार: यह डील दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत और 27 देशों के शक्तिशाली यूरोपीय ब्लॉक को जोड़ती है।
क्या सस्ता होगा और किसे मिलेगा फायदा?
इस समझौते का सीधा असर उपभोक्ताओं और व्यापारियों की जेब पर पड़ने वाला है। यहाँ कुछ प्रमुख सेक्टर्स का विश्लेषण दिया गया है:
1. ऑटोमोबाइल: लग्जरी कारें होंगी सस्ती
यूरोपीय संघ की बीएमडब्ल्यू (BMW), ऑडी (Audi) और मर्सिडीज जैसी कारों पर भारत का 110% का भारी भरकम आयात शुल्क अब धीरे-धीरे कम होकर 10% तक आ जाएगा। हालांकि, यह लाभ सालाना 2.5 लाख कारों के कोटा तक सीमित होगा, जिससे घरेलू बाजार को भी सुरक्षा मिलेगी।
2. वाइन और स्पिरिट्स: प्रीमियम ड्रिंक्स के घटेंगे दाम
यूरोपीय वाइन पर लगने वाला 150% का टैरिफ तुरंत प्रभाव से कम होकर 75% और आने वाले समय में 20% तक नीचे लाया जाएगा। जैतून का तेल (Olive Oil) और चॉकलेट जैसे उत्पादों पर भी शुल्क पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।
3. भारतीय निर्यातकों की चांदी
भारत के कपड़ा (Textiles), चमड़ा (Leather), फुटवियर, जेम्स एंड ज्वेलरी और फार्मा सेक्टर को यूरोपीय बाजार में ‘जीरो टैरिफ’ एंट्री मिलेगी। इससे भारतीय सामान वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले सस्ते और आकर्षक हो जाएंगे।
समझौते की 5 सबसे बड़ी बातें
| उत्पाद/सेक्टर | वर्तमान टैरिफ (अनुमानित) | भविष्य का टैरिफ (डील के बाद) |
| यूरोपीय कारें | 110% | 10% (निर्धारित कोटा के तहत) |
| यूरोपीय वाइन | 150% | 20% – 30% |
| भारतीय कपड़ा (Textiles) | 9% – 12% | 0% |
| मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स | 44% तक | 0% (अधिकांश उत्पादों पर) |
| फार्मास्यूटिकल्स | 11% | 0% |
ट्रंप के टैरिफ वॉर के बीच भारत का ‘मास्टरस्ट्रोक’
यह समझौता ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय और यूरोपीय सामानों पर भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है। भारत और ईयू का एक साथ आना वैश्विक स्तर पर एक बड़ा कूटनीतिक संदेश है।
- बाजार विविधीकरण: भारत अब अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम कर यूरोप के विशाल बाजार का लाभ उठा सकेगा।
- सुरक्षा और रक्षा: व्यापार के साथ-साथ दोनों पक्षों ने सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
पर्यावरण और ग्रीन एनर्जी: ₹4,500 करोड़ की मदद
इस समझौते के तहत, यूरोपीय संघ भारत को ग्रीन ट्रांजिशन और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए 500 मिलियन यूरो (लगभग ₹4,500 करोड़) की वित्तीय सहायता भी प्रदान करेगा। इसके अलावा, एक ‘ग्रीन हाइड्रोजन टास्क फोर्स’ का भी गठन किया गया है।
निष्कर्ष: एक नए स्वर्णिम युग की शुरुआत
भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता 2026 केवल आयात-निर्यात की बात नहीं है, बल्कि यह दो महान लोकतंत्रों के बीच विश्वास का प्रमाण है। जहाँ भारत को आधुनिक तकनीक और निवेश मिलेगा, वहीं यूरोप को दुनिया का सबसे युवा और बड़ा उपभोक्ता बाजार।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. क्या इस समझौते से भारतीय किसानों को नुकसान होगा?
नहीं, भारत ने डेयरी सेक्टर और संवेदनशील कृषि उत्पादों (जैसे चावल, चीनी और गोमांस) को इस समझौते से बाहर रखा है ताकि किसानों के हितों की रक्षा की जा सके।
Q2. यह समझौता कब से लागू होगा?
बातचीत पूरी हो चुकी है। अब इसे यूरोपीय संसद और भारत की कैबिनेट से मंजूरी मिलनी है। उम्मीद है कि यह 2027 की शुरुआत तक पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा।
Q3. क्या आईफोन और अन्य गैजेट्स सस्ते होंगे?
यूरोपीय संघ से आने वाले कंपोनेंट्स और मशीनरी पर शुल्क कम होने से भारत में मैन्युफैक्चरिंग की लागत घटेगी, जिससे भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक सामान सस्ते हो सकते हैं।






