कीमती धातुओं में महा-विस्फोट: सोना ₹1.8 लाख और चांदी ₹4 लाख के पार, क्या ट्रंप की नीतियों ने बदला वैश्विक बाजार का रुख?

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नई दिल्ली | 29 जनवरी 2026: भारतीय सर्राफा बाजार के इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। वैश्विक अस्थिरता और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई आर्थिक नीतियों के डर से सोने और चांदी की कीमतों ने वो मुकाम हासिल किया है, जिसकी कल्पना कुछ महीनों पहले तक नामुमकिन थी।

आज MCX (Multi Commodity Exchange) पर सोना ₹1,80,501 प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जबकि चांदी ने ₹4,07,456 प्रति किलोग्राम का जादुई आंकड़ा पार कर दुनिया को चौंका दिया।

कीमतों में उछाल के 3 सबसे बड़े कारण (Trigger Factors)

1. ट्रंप का ‘यूरोप टैरिफ’ कार्ड

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में यूरोपीय देशों पर 10% से 25% तक के आयात शुल्क (Tariff) लगाने की धमकी दी है। इसके पीछे ग्रीनलैंड विवाद और व्यापार असंतुलन को मुख्य कारण बताया जा रहा है। इस ‘व्यापार युद्ध’ (Trade War) की आशंका ने डॉलर की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे निवेशक कागजी मुद्रा के बजाय ‘हार्ड एसेट’ यानी सोने की ओर भाग रहे हैं।

2. भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Fears)

ईरान और मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव, और अमेरिका के भीतर सरकारी शटडाउन का खतरा—इन सबने मिलकर एक ऐसी वैश्विक अनिश्चितता पैदा कर दी है जहाँ सोना “अंतिम शरणस्थली” बन गया है।

3. केंद्रीय बैंकों की ताबड़तोड़ खरीदारी

रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन, रूस और भारत सहित दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। अकेले 2026 के पहले महीने में ही वैश्विक स्तर पर भारी मात्रा में सोने का भंडारण किया गया है, जिससे सप्लाई कम और डिमांड सातवें आसमान पर पहुंच गई है।

MCX और अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल

मेटलआज की कीमत (भारतीय बाजार)अंतरराष्ट्रीय भाव (COMEX)
सोना (24K)₹1,80,500+ / 10 ग्राम$5,600+ / औंस
चांदी₹4,07,400+ / किलोग्राम$120+ / औंस

भारतीय निवेशकों पर असर: अवसर या खतरा?

सोने और चांदी की कीमतों में इस अभूतपूर्व तेजी ने भारतीय परिवारों और ज्वेलरी सेक्टर को हिला कर रख दिया है।

  • शादियों का सीजन: भारत में शादियों का सीजन चल रहा है और सोने के दाम ₹1.8 लाख होने से आम आदमी की जेब पर भारी बोझ पड़ा है। लोग अब शुद्ध सोने के बजाय डायमंड या लाइटवेट ज्वेलरी की ओर रुख कर रहे हैं।
  • प्रॉफिट बुकिंग का समय: बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी तेजी के बाद एक छोटा सुधार (Correction) संभव है। यदि आपने निचले स्तरों पर निवेश किया था, तो यह आंशिक मुनाफावसूली का अच्छा समय हो सकता है।
  • डिजिटल गोल्ड और ETF: फिजिकल गोल्ड के बजाय गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) में निवेश आज 13% तक उछला है, जो सुरक्षित निवेश का नया जरिया बन रहा है।

विशेषज्ञों की राय: क्या कीमतें और बढ़ेंगी?

ज्यादातर कमोडिटी एनालिस्ट्स का मानना है कि जब तक रूस-यूक्रेन, ईरान और अमेरिका-यूरोप के बीच व्यापारिक विवाद नहीं सुलझते, सोने की कीमतों में गिरावट की संभावना कम है। जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के अंत तक सोना $6,000 प्रति औंस को भी छू सकता है।

“यह केवल सट्टेबाजी नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के बदलते स्वरूप का प्रतिबिंब है। निवेशक अब कागजी वादों (Paper Promises) के बजाय उस धातु पर भरोसा कर रहे हैं जिसका मूल्य सदियों से सुरक्षित रहा है।” – बाजार विश्लेषक

निष्कर्ष: निवेश की रणनीति क्या हो?

यदि आप लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो ‘Buy on Dips’ (गिरावट पर खरीदारी) की रणनीति अपनाएं। बाजार वर्तमान में ‘Overbought’ (अत्यधिक खरीदा हुआ) जोन में है, इसलिए कीमतों में ₹10,000-15,000 की गिरावट आने का इंतजार करना समझदारी होगी।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या 2026 में चांदी ₹5 लाख तक पहुंच सकती है?

औद्योगिक मांग और सौर ऊर्जा क्षेत्र में चांदी के बढ़ते उपयोग को देखते हुए, विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 के अंत तक चांदी ₹5 लाख का स्तर देख सकती है।

Q2. गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में ट्रंप का क्या रोल है?

ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ और टैरिफ नीतियां वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता पैदा करती हैं। जब भी व्यापार युद्ध की स्थिति बनती है, सोने की कीमतें बढ़ती हैं।

Q3. निवेश के लिए फिजिकल गोल्ड बेहतर है या गोल्ड ईटीएफ?

वर्तमान कीमतों और सुरक्षा को देखते हुए गोल्ड ईटीएफ या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) अधिक फायदेमंद हैं क्योंकि इनमें मेकिंग चार्ज और सुरक्षा की चिंता नहीं होती।