ट्रंप का ‘मास डिपोर्टेशन’ अभियान: मिनीपोलिस में भारी बवाल, पत्रकार जॉर्जिया फोर्ट गिरफ्तार; क्या लोकतंत्र खतरे में है?

ट्रंप का 'मास डिपोर्टेशन'

मिनीपोलिस/वॉशिंगटन | 31 जनवरी 2026: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का सबसे विवादास्पद अध्याय शुरू हो चुका है। ‘मास डिपोर्टेशन’ यानी अवैध प्रवासियों को बड़े पैमाने पर देश से बाहर निकालने के अभियान ने मिनीपोलिस शहर को युद्ध के मैदान में बदल दिया है। शुक्रवार और शनिवार को हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे, जिन्हें तितर-बितर करने के लिए फेडरल एजेंट्स ने सख्त रुख अपनाया।

इसी हंगामे के बीच, स्वतंत्र पत्रकार जार्जिया फोर्ट (Georgia Fort) की गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान इस ओर खींचा है कि क्या अमेरिका में अब सच दिखाना भी अपराध बनता जा रहा है।

मिनीपोलिस: विरोध प्रदर्शन का केंद्र क्यों बना?

मिनीपोलिस वही शहर है जहाँ 2020 में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद दुनिया भर में प्रदर्शन हुए थे। जनवरी 2026 में, यह शहर फिर से सुलग रहा है, और इसके पीछे मुख्य कारण ‘ऑपरेशन मेट्रो सर्ज’ (Operation Metro Surge) है।

  1. दो अमेरिकी नागरिकों की मौत: इस महीने की शुरुआत में फेडरल एजेंट्स की कार्रवाई के दौरान दो अमेरिकी नागरिक, रेनी गुड और एलेक्स प्रेटी, की गोली लगने से मौत हो गई। इन मौतों ने आग में घी डालने का काम किया है।
  2. 3,000 फेडरल एजेंट्स की तैनाती: शहर में स्थानीय पुलिस से पांच गुना ज्यादा यानी लगभग 3,000 ICE (Immigration and Customs Enforcement) और बॉर्डर पेट्रोल एजेंट्स तैनात किए गए हैं।
  3. नागरिकों में डर का माहौल: प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि एजेंट्स केवल अवैध प्रवासियों को ही नहीं, बल्कि वैध दस्तावेजों वाले लोगों को भी उनके हुलिए और लहजे के आधार पर निशाना बना रहे हैं।

पत्रकार जॉर्जिया फोर्ट की गिरफ्तारी और अभिव्यक्ति की आजादी

स्वतंत्र और पुरस्कृत पत्रकार जॉर्जिया फोर्ट को उस समय गिरफ्तार किया गया जब वह एक चर्च के बाहर हो रहे विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रही थीं।

  • आरोप: उन पर ‘धार्मिक स्वतंत्रता के प्रयोग में बाधा डालने’ और ‘साजिश’ जैसे गंभीर फेडरल आरोप लगाए गए हैं।
  • सच्चाई: जॉर्जिया ने अपनी गिरफ्तारी से ठीक पहले फेसबुक लाइव पर कहा, “मैं एक पत्रकार के रूप में वहां केवल रिकॉर्डिंग कर रही थी, मैं प्रदर्शनकारी नहीं हूं।” * प्रतिक्रिया: कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) और कई मीडिया संगठनों ने इसे ‘प्रथम संशोधन’ (First Amendment) यानी प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया है। केवल जॉर्जिया ही नहीं, पूर्व CNN एंकर डॉन लेमन को भी इसी तरह के आरोपों में हिरासत में लिया गया है।
Trump Mass Deportation Protest 2026

ट्रंप प्रशासन का पक्ष: ‘अमेरिका को सुरक्षित बनाना’

दूसरी ओर, व्हाइट हाउस और होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) का दावा है कि यह अभियान देश की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।

  • अपराध में कमी: प्रशासन का तर्क है कि मास डिपोर्टेशन से हत्या, डकैती और नशीले पदार्थों की तस्करी में भारी कमी आई है।
  • आर्थिक लाभ: सरकार का कहना है कि प्रवासियों के जाने से घरों की कीमतें कम हो रही हैं और अमेरिकी नागरिकों की मजदूरी में वृद्धि हो रही है।
  • टॉम होमन का बयान: बॉर्डर जार टॉम होमन ने स्पष्ट किया है कि जब तक स्थानीय अधिकारी सहयोग नहीं करेंगे, तब तक फेडरल एजेंट्स का ऑपरेशन जारी रहेगा।

भारतीय प्रवासियों पर क्या होगा असर?

यह मुद्दा केवल मिनीपोलिस तक सीमित नहीं है। ट्रंप के इस अभियान का असर भारतीय समुदाय पर भी पड़ रहा है:

  • अवैध प्रवासियों की घर वापसी: फरवरी 2025 से अब तक सैकड़ों भारतीयों को विशेष सैन्य विमानों के जरिए वापस भारत भेजा जा चुका है।
  • डॉक्यूमेंटेशन की सख्ती: अब वर्कप्लेस और सार्वजनिक स्थानों पर रैंडम चेकिंग बढ़ गई है, जिससे वैध रूप से रह रहे भारतीयों में भी अनिश्चितता का माहौल है।

निष्कर्ष: आगे क्या?

मिनीपोलिस के विरोध प्रदर्शनों ने यह साबित कर दिया है कि ट्रंप की डिपोर्टेशन नीति को कड़े नागरिक विरोध का सामना करना पड़ेगा। पत्रकारों की गिरफ्तारी ने इस लड़ाई को अब ‘मानवाधिकार बनाम कानून व्यवस्था’ की जगह ‘लोकतंत्र बनाम तानाशाही’ की बहस में बदल दिया है।

“जब कैमरे बंद किए जाते हैं और कलम रोकी जाती है, तो अंधेरे में होने वाली कार्रवाइयां और भी खतरनाक हो जाती हैं।” – एक नागरिक अधिकार कार्यकर्ता


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. ‘ऑपरेशन मेट्रो सर्ज’ क्या है?

यह ट्रंप प्रशासन द्वारा मिनीपोलिस में चलाया जा रहा सबसे बड़ा इमिग्रेशन क्रैकडाउन है, जिसका उद्देश्य अवैध प्रवासियों को ढूंढकर डिपोर्ट करना है।

Q2. जॉर्जिया फोर्ट को क्यों गिरफ्तार किया गया?

उन्हें सेंट पॉल में एक चर्च के बाहर हो रहे एंटी-ICE विरोध प्रदर्शन को कवर करने के दौरान ‘फेडरल राइट्स’ के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

Q3. क्या यह विरोध प्रदर्शन अन्य शहरों में भी फैल रहा है?

जी हाँ, लॉस एंजिल्स, न्यूयॉर्क और शिकागो जैसे ‘सैंक्चुअरी सिटीज’ में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शनों की खबरें आ रही हैं।