इस्लामाबाद | 6 फरवरी 2026: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद, जो देश के सबसे सुरक्षित शहरों में से एक माना जाता है, आज धमाकों की गूंज और चीख-पुकार से दहल उठा। तरलाई इलाके में स्थित खदीजतुल कुबरा इमामबाड़ा में एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को बम से उड़ा लिया। हमले के समय मस्जिद में लगभग 700 लोग जुमे की नमाज के लिए मौजूद थे।
कैसे हुआ हमला? (The Incident Details)
चश्मदीदों और पुलिस सूत्रों के अनुसार, हमलावर ने दोपहर करीब 1:30 बजे मस्जिद में घुसने की कोशिश की।
- गेट पर रोका गया: जब सुरक्षा गार्डों ने हमलावर को गेट पर रोका, तो उसने अचानक से गोलीबारी शुरू कर दी और भागते हुए मस्जिद के परिसर में घुस गया।
- भीषण विस्फोट: हमलावर ने नमाजियों की भीड़ के बीच पहुंचकर अपनी जैकेट में लगे विस्फोटकों को सक्रिय कर दिया।
- मलबे का ढेर: धमाका इतना जोरदार था कि मस्जिद की तीन मंजिला इमारत की खिड़कियां टूट गईं और गेट का ढांचा पूरी तरह गिर गया।
कैजुअल्टी रिपोर्ट: मातम में बदली खुशियां
अस्पताल और बचाव कर्मियों द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, यह इस्लामाबाद में पिछले दो दशकों के सबसे घातक हमलों में से एक है।
| विवरण | आंकड़े |
| कुल मृतक | 31 (संख्या बढ़ने की आशंका) |
| कुल घायल | 169 – 175 |
| गंभीर स्थिति | 25+ नमाजी वेंटिलेटर पर |
| प्रभावित क्षेत्र | तरलाई कलां, इस्लामाबाद |
अस्पतालों में इमरजेंसी: धमाके के बाद इस्लामाबाद के PIMS (Pakistan Institute of Medical Sciences) और पॉलीक्लिनिक अस्पतालों में ‘रेड अलर्ट’ घोषित कर दिया गया है। घायलों की संख्या इतनी अधिक थी कि कुछ मरीजों को पड़ोसी शहर रावलपिंडी रेफर करना पड़ा।
हमले के पीछे किसका हाथ? (Who is Responsible?)
फिलहाल किसी भी आतंकी संगठन ने आधिकारिक तौर पर इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन जांच की सुई कुछ प्रमुख गुटों की ओर इशारा कर रही है:
- टीटीपी (TTP): पुलिस सूत्रों ने हमलावर के तार ‘फितना अल-ख्वारजी’ (TTP का सरकारी नाम) से जुड़े होने का संदेह जताया है, हालांकि टीटीपी ने लिखित बयान जारी कर इसमें शामिल होने से इनकार किया है।
- ISIS-K: सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शिया समुदाय को निशाना बनाने का तरीका अक्सर इस्लामिक स्टेट (IS-K) का रहा है।
- विदेशी हाथ: शुरुआती जांच में पुलिस ने हमलावर के ‘विदेशी नागरिक’ होने की संभावना भी जताई है।
राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
यह हमला उस समय हुआ जब उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव पाकिस्तान की राजकीय यात्रा पर हैं।
“निर्दोष नमाजियों को निशाना बनाना मानवता के खिलाफ सबसे बड़ा अपराध है। हम इस कायरतापूर्ण कृत्य की कड़ी निंदा करते हैं।” — आसिफ अली जरदारी, राष्ट्रपति (पाकिस्तान)
“आतंकवाद के खिलाफ देश एकजुट है और हम दोषियों को उनके अंजाम तक पहुँचाकर रहेंगे।” — शहबाज शरीफ, प्रधानमंत्री (पाकिस्तान)
सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान
इस्लामाबाद जैसे हाई-प्रोफाइल शहर में, जहां सेना और पुलिस की भारी तैनाती रहती है, वहां इस तरह का हमला होना सुरक्षा में एक बड़ी चूक (Security Lapse) मानी जा रही है।
- पिछला हमला: नवंबर 2025 में भी इस्लामाबाद की एक जिला अदालत के बाहर आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें 12 लोग मारे गए थे।
- हाई अलर्ट: हमले के बाद पूरे पाकिस्तान के प्रमुख शहरों में शिया इमामबाड़ों और संवेदनशील धार्मिक स्थलों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
निष्कर्ष: शांति की राह में एक और बाधा
इस्लामाबाद मस्जिद हमला न केवल पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा की पोल खोलता है, बल्कि यह क्षेत्र में बढ़ती कट्टरपंथी हिंसा का भी संकेत है। जब तक आतंकी नेटवर्क और उनके समर्थकों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती, तब तक मासूम नागरिकों के खून से ऐसी होली खेली जाती रहेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. इस्लामाबाद मस्जिद हमला कब हुआ?
यह हमला 6 फरवरी 2026 को जुमे की नमाज के दौरान दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ।
Q2. खदीजतुल कुबरा मस्जिद कहाँ स्थित है?
यह मस्जिद इस्लामाबाद के दक्षिण-पूर्वी उपनगर तरलाई कलां (Tarlai Kalan) में स्थित है।
Q3. हमले में कितने लोग मारे गए?
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, 31 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 170 से अधिक लोग घायल हैं।







