नई दिल्ली/मुंबई | 7 फरवरी 2026: शनिवार की सुबह भारत के महानगरों—दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद—में सन्नाटा पसरा है। तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) के नेतृत्व में “ऑल इंडिया ब्रेकडाउन” के कारण लाखों ड्राइवरों ने अपने ऐप्स लॉग-आउट कर दिए हैं। सड़कों पर कैब के लिए मारामारी है और ऐप पर किराया सामान्य से 3-4 गुना अधिक दिख रहा है।
सर्ज प्राइसिंग का मिथक: किसे मिलता है मोटा मुनाफा?
जब मांग अधिक होती है और गाड़ियां कम, तो एल्गोरिदम किराया बढ़ा देता है जिसे ‘सर्ज प्राइसिंग’ (Surge Pricing) कहते हैं। आम यात्री को लगता है कि बढ़ा हुआ किराया सीधे ड्राइवर की जेब में जा रहा है। लेकिन ऑल दिल्ली ऑटो टैक्सी कांग्रेस यूनियन के अध्यक्ष किशन वर्मा का बयान इस धारणा को तोड़ता है:
“जनता सोचती है कि हम सर्ज प्राइसिंग में पैसा छाप रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि ड्राइवर को उस बढ़े हुए किराये का बमुश्किल 10-15% मिलता है। बाकी हिस्सा एग्रीगेटर कंपनियां कमीशन और फीस के नाम पर डकार जाती हैं। हमें मिलता है तो बस यात्रियों का गुस्सा और बदनामी।”
क्यों भड़का है ड्राइवरों का गुस्सा? (प्रमुख मांगें)
ड्राइवरों ने केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर अपनी समस्याओं का अंबार लगाया है:
- न्यूनतम बेस फेयर का अभाव: कंपनियों के पास मनमाना किराया तय करने की छूट है क्योंकि सरकार ने अभी तक ‘न्यूनतम बेस फेयर’ को नोटिफाई नहीं किया है।
- भारी कमीशन: कंपनियां प्रति राइड 25% से 40% तक कमीशन काट रही हैं, जबकि 2023 से ईंधन की कीमतों में 25% का इजाफा हुआ है।
- पैनिक बटन का खर्च: पैनिक बटन अनिवार्य करने के कारण ड्राइवरों को पुराने उपकरण बदलकर नए लगवाने के लिए लगभग ₹12,000 अपनी जेब से देने पड़ रहे हैं।
- निजी वाहनों पर रोक: व्हाइट नंबर प्लेट (प्राइवेट कार/बाइक) का कमर्शियल इस्तेमाल ड्राइवरों की रोजी-रोटी छीन रहा है।
तुलनात्मक विश्लेषण: ड्राइवर की वास्तविक कमाई
| विवरण | सामान्य राइड (₹) | सर्ज राइड (₹) |
| यात्री ने भुगतान किया | 200 | 600 |
| कंपनी का कमीशन (30%) | 60 | 180 |
| प्लेटफॉर्म/सर्ज फीस | 10 | 250 |
| ड्राइवर को मिला | 130 | 170 |
नोट: ऊपर दिए गए आंकड़े प्रतीकात्मक हैं, जो ड्राइवरों द्वारा बताए गए औसत अंतर को दर्शाते हैं।
‘भारत टैक्सी’ का उदय: क्या बदलेगा खेल?
दिलचस्प बात यह है कि यह हड़ताल दिल्ली में ‘भारत टैक्सी’ की लॉन्चिंग के बीच हो रही है। यह देश की पहली सहकारी (Cooperative) राइड-हेलिंग सर्विस होने का दावा कर रही है, जिसमें:
- जीरो कमीशन: ड्राइवरों से कोई कमीशन नहीं लिया जाएगा।
- नो सर्ज प्राइसिंग: यात्रियों के लिए पारदर्शी और स्थिर किराया।
- ड्राइवर ही इस ऐप के मालिक होंगे, जिससे शोषण की गुंजाइश खत्म होगी।
यात्रियों के लिए सुझाव: क्या करें आज?
अगर आप आज यात्रा करने वाले हैं, तो ओला-उबर के भरोसे न रहें:
- मेट्रो और सिटी बस: अपनी यात्रा के लिए सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें।
- प्राइवेट टैक्सी स्टैंड: स्थानीय टैक्सी स्टैंड या काली-पीली टैक्सियों से पहले ही बुकिंग कर लें।
- भारत टैक्सी या लोकल ऐप्स: ‘भारत टैक्सी’ जैसे नए विकल्पों को आज़माएं जहाँ ड्राइवर उपलब्ध हो सकते हैं।
निष्कर्ष: डिजिटल गुलामी बनाम अधिकार
आज की हड़ताल इस बात का संकेत है कि भारत की गिग इकोनॉमी अब एक बड़े बदलाव की मांग कर रही है। जब तक मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025 के तहत ड्राइवरों को सामाजिक सुरक्षा और उचित आय की गारंटी नहीं मिलती, तब तक सड़कों पर ऐसा विरोध बार-बार देखने को मिलेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. आज की हड़ताल कितने बजे तक है?
यह एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल है, जो 7 फरवरी की रात तक जारी रह सकती है।
Q2. क्या सर्ज प्राइसिंग का लाभ ड्राइवरों को मिलता है?
नहीं, ड्राइवरों का आरोप है कि सर्ज प्राइसिंग का बड़ा हिस्सा कंपनियां ‘प्लेटफॉर्म फीस’ के रूप में रख लेती हैं।
Q3. ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि देशभर के ड्राइवर एक साथ अपने मोबाइल ऐप्स बंद (Log-out) करके काम का बहिष्कार कर रहे हैं।







