नई दिल्ली | 9 फरवरी 2026: वैश्विक तेल बाजार में एक बार फिर भारत की दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) ने अपनी धाक जमाई है। करीब डेढ़ साल के अंतराल के बाद, मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस ने दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला से 20 लाख बैरल कच्चे तेल की खरीद का बड़ा सौदा किया है। यह डील ऐसे समय में हुई है जब रूस से भारत का तेल आयात घट रहा है और अमेरिका के साथ व्यापारिक समीकरण बदल रहे हैं।
1. भारी डिस्काउंट पर हुई बड़ी डील
रॉयटर्स और ट्रेड सूत्रों के अनुसार, रिलायंस ने यह तेल ‘विटोल’ (Vitol) नामक वैश्विक ट्रेडिंग कंपनी से खरीदा है। इस सौदे की सबसे खास बात इसकी कीमत है:
- डिस्काउंट का जादू: रिलायंस ने यह तेल वैश्विक बेंचमार्क ICE Brent के मुकाबले $6.50 से $7.00 प्रति बैरल की भारी छूट पर खरीदा है।
- डिलीवरी का समय: यह तेल का विशाल जहाज (VLCC) अप्रैल 2026 में भारत पहुंचने की उम्मीद है।
2. रूस से मोहभंग और वेनेजुएला की ओर रुख?
पिछले दो वर्षों से भारत अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा रूस से ‘सस्ते तेल’ के रूप में ले रहा था। लेकिन अब स्थितियां बदल रही हैं:
- अमेरिकी दबाव: ट्रंप प्रशासन के आने के बाद रूसी तेल पर नए प्रतिबंधों और शुल्कों की चर्चा तेज है।
- आपूर्ति में विविधता (Diversification): भारत सरकार और रिलायंस जैसे बड़े रिफाइनर्स किसी एक देश (रूस) पर निर्भर नहीं रहना चाहते। वेनेजुएला, जिसके पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, एक बार फिर भारत के लिए आकर्षक विकल्प बन गया है।
3. ‘नो कंसेंट, नो ऑयल’ से ‘फ्री ट्रेड’ तक का सफर
वेनेजुएला पर लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंध लगे थे। लेकिन हालिया घटनाक्रमों के बाद:
- अमेरिकी लाइसेंस: विटोल और ट्रैफिगुरा जैसी कंपनियों को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग से वेनेजुएला का तेल बेचने का लाइसेंस मिला है।
- भारत-अमेरिका ट्रेड डील: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ट्रेड एग्रीमेंट ने भारतीय कंपनियों के लिए वेनेजुएला से तेल आयात करने की राह आसान कर दी है।
भारत की तेल आयात रणनीति: एक नज़र में
| विवरण | रूस (2024-25) | वेनेजुएला (2026) |
| डिस्काउंट स्तर | $15-$20 प्रति बैरल (शुरुआत में) | $6.5-$7 प्रति बैरल (वर्तमान) |
| ट्रांसपोर्ट लागत | कम (नजदीकी रूट) | अधिक (लंबा समुद्री रास्ता) |
| रणनीतिक स्थिति | कूटनीतिक दबाव के घेरे में | अमेरिका के ‘कंट्रोल्ड फ्रेमवर्क’ में |
| रिफाइनिंग | आसान | भारी क्रूड (रिलायंस के लिए अनुकूल) |
4. रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी को मिलेगा फायदा
रिलायंस दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स (जामनगर) चलाती है। वेनेजुएला का तेल ‘भारी’ (Heavy Crude) होता है, और रिलायंस की रिफाइनरी इसे प्रोसेस करने के लिए दुनिया में सबसे सक्षम मानी जाती है। कम कीमत पर कच्चा तेल मिलने से रिलायंस का रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) बढ़ेगा, जिसका सीधा असर कंपनी के शेयरों और मुनाफे पर पड़ेगा।
5. विदेश मंत्रालय का स्टैंड: ‘ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि’
भारत के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत वहां से तेल खरीदेगा जहां उसे व्यावसायिक रूप से फायदा होगा। वेनेजुएला के साथ यह डील इसी ‘इंडिपेंडेंट फॉरेन पॉलिसी’ का हिस्सा है।
निष्कर्ष: भारत के लिए ‘सस्ती ऊर्जा’ का नया द्वार
वेनेजुएला से तेल की वापसी भारत के लिए एक बड़ा राहत भरा कदम है। इससे न केवल घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की सौदेबाजी की शक्ति (Bargaining Power) भी बढ़ेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. रिलायंस ने वेनेजुएला से कितना तेल खरीदा है?
रिलायंस ने 20 लाख बैरल कच्चे तेल का सौदा किया है, जो अप्रैल 2026 में डिलीवर होगा।
Q2. क्या वेनेजुएला का तेल रूस के तेल से सस्ता है?
वर्तमान में रूसी तेल पर मिलने वाला डिस्काउंट कम हुआ है, जबकि वेनेजुएला से $7 तक का डिस्काउंट मिल रहा है, जो रिलायंस जैसी बड़ी रिफाइनरी के लिए फायदेमंद है।
Q3. क्या इस डील पर अमेरिका को कोई आपत्ति है?
यह डील अमेरिका द्वारा जारी किए गए वैध ट्रेडिंग लाइसेंस के तहत की गई है, इसलिए वर्तमान में इस पर किसी प्रतिबंध का खतरा नहीं है।






