जिनेवा/नई दिल्ली: दुनिया की नजरें एक बार फिर स्विट्जरलैंड के खूबसूरत शहर जिनेवा पर टिकी हैं। चार साल से चल रहे विनाशकारी रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) को समाप्त करने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता में एक और बड़ा प्रयास शुरू हो गया है। 17-18 फरवरी 2026 को होने वाली इस त्रिपक्षीय वार्ता को लेकर वैश्विक कूटनीति के गलियारे गरमाए हुए हैं।
इस बैठक की सबसे चौंकाने वाली खबर यह है कि यूक्रेन ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए एक बड़ी शर्त रख दी है—अमेरिका से कम से कम 20 साल की ठोस सुरक्षा गारंटी (Security Guarantee)।
जिनेवा वार्ता: शांति की उम्मीद या सिर्फ एक औपचारिक प्रयास?
रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडल जिनेवा पहुंच चुके हैं। अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। इससे पहले अबू धाबी में हुई दो दौर की बातचीत में कैदियों की अदला-बदली पर तो सहमति बनी थी, लेकिन मुख्य मुद्दों पर गतिरोध बरकरार रहा।
यूक्रेन की मांग: 20 साल का ‘सुरक्षा कवच’
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में स्पष्ट कर दिया कि वे किसी भी ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे जो भविष्य में रूस को फिर से हमला करने का मौका दे।
- 15 बनाम 20 साल: सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका ने पहले 15 साल की सुरक्षा गारंटी का प्रस्ताव दिया था, लेकिन जेलेंस्की ने इसे ठुकराते हुए कम से कम 20 साल की कानूनी रूप से बाध्यकारी (Water-tight) गारंटी मांगी है।
- यूरोपीय शांति सेना: यूक्रेन चाहता है कि इस गारंटी में न केवल अमेरिकी समर्थन हो, बल्कि एक ‘यूरोपीय शांति सेना’ की तैनाती का भी स्पष्ट रोडमैप हो।
- निवेशकों का भरोसा: जेलेंस्की का तर्क है कि जब तक दीर्घकालिक सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलेगी, युद्ध के बाद यूक्रेन के पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय निवेशक देश में पैसा लगाने से हिचकेंगे।
रूस का रुख: जमीन और दबदबा
दूसरी ओर, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने स्पष्ट किया है कि रूस के लिए मुख्य मुद्दा ‘क्षेत्रीय वास्तविकताएं’ हैं।
- डोनबास पर नियंत्रण: रूस वर्तमान में यूक्रेन के लगभग 20% हिस्से पर कब्जा जमाए हुए है। व्लादिमीर पुतिन के प्रतिनिधि व्लादिमीर मेडिंस्की इस वार्ता में रूस की उन मांगों को दोहरा सकते हैं जिनमें विसैन्यीकरण (Demilitarization) और विवादित क्षेत्रों पर रूसी संप्रभुता शामिल है।
- वार्ता से पहले हमले: वार्ता शुरू होने से ठीक पहले रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा ठिकानों पर 29 मिसाइलों और करीब 400 ड्रोन्स से भीषण हमला किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यूक्रेन पर टेबल पर झुकने के लिए बनाया गया मनोवैज्ञानिक दबाव है।
डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका: ‘जून डेडलाइन’ का दबाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिन्होंने चुनाव के दौरान 24 घंटे में युद्ध रुकवाने का दावा किया था, अब कड़े फैसले ले रहे हैं।
- ट्रंप प्रशासन ने दोनों देशों को जून 2026 तक का समय दिया है।
- अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने संकेत दिया है कि यदि शांति वार्ता में प्रगति नहीं होती, तो अमेरिका अपनी रणनीति को ‘एकतरफा’ (Go it alone) तरीके से बदल सकता है।
शांति वार्ता के मुख्य चुनौतीपूर्ण बिंदु
जिनेवा शिखर सम्मेलन 2026 में जिन मुद्दों पर सबसे ज्यादा माथापच्ची होने वाली है, वे निम्नलिखित हैं:
- क्षेत्रीय रियायतें: क्या यूक्रेन डोनबास और क्रीमिया जैसे इलाकों पर अपना दावा छोड़ेगा?
- NATO और सुरक्षा: सुरक्षा गारंटी का स्वरूप क्या होगा? क्या यह NATO की सदस्यता का विकल्प बनेगी?
- चुनाव: अमेरिका चाहता है कि यूक्रेन में मई के मध्य तक चुनाव हों, जबकि जेलेंस्की का कहना है कि चुनाव केवल युद्धविराम के दो महीने बाद ही संभव हैं।
- ऊर्जा सुरक्षा: सर्दी के मौसम में तबाह हुए ग्रिड्स और बिजली उत्पादन इकाइयों को लेकर रूस की गारंटी।
निष्कर्ष: क्या दुनिया को मिलेगी राहत?
रूस-यूक्रेन युद्ध ने न केवल यूरोप बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। भारत जैसे देश भी इस संघर्ष के जल्द समाधान की उम्मीद कर रहे हैं ताकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा की कीमतें स्थिर हो सकें। जिनेवा की यह वार्ता एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकती है, लेकिन यूक्रेन की 20 साल की सुरक्षा गारंटी और रूस की क्षेत्रीय मांगों के बीच का रास्ता निकालना बेहद कठिन चुनौती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. जिनेवा शांति वार्ता 2026 का नेतृत्व कौन कर रहा है?
इस वार्ता का नेतृत्व अमेरिका (स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर), रूस (व्लादिमीर मेडिंस्की) और यूक्रेन (रुस्तम उमेरोव) के प्रतिनिधिमंडल कर रहे हैं।
2. यूक्रेन 20 साल की सुरक्षा गारंटी क्यों मांग रहा है?
यूक्रेन चाहता है कि भविष्य में रूस दोबारा आक्रमण न करे और देश के पुनर्निर्माण के लिए विदेशी निवेशकों को एक सुरक्षित वातावरण मिले।
3. क्या भारत इस शांति वार्ता का हिस्सा है?
फिलहाल यह एक त्रिपक्षीय वार्ता है जिसमें अमेरिका मध्यस्थ है। हालांकि, भारत ने हमेशा ‘संवाद और कूटनीति’ के जरिए समाधान निकालने का समर्थन किया है।
4. इस युद्ध का अब तक क्या असर हुआ है?
एक रिपोर्ट के अनुसार, अब तक लगभग 20 लाख सैनिक और हजारों नागरिक इस युद्ध में हताहत हुए हैं, और यूक्रेन का ऊर्जा ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है।








