Bharat Mandapam AI Summit Protest: शर्टलेस प्रदर्शन या अंतरराष्ट्रीय साजिश? दिल्ली पुलिस का ‘Global Defamation’ को लेकर बड़ा खुलासा

Bharat Mandapam AI Summit Protest

नई दिल्ली: देश की राजधानी के हाई-टेक वेन्यू भारत मंडपम में जब दुनिया भर के दिग्गज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य पर चर्चा कर रहे थे, तभी वहां अचानक हुए एक विरोध प्रदर्शन ने सबको चौंका दिया। भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के कार्यकर्ताओं ने समिट के बीच में ही ‘शर्टलेस’ (Shirtless) होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।

शुरुआत में इसे एक सामान्य राजनीतिक विरोध माना जा रहा था, लेकिन अब दिल्ली पुलिस ने इस मामले में ‘ग्लोबल डिफेमेशन कॉन्स्पिरसी’ (Global Defamation Conspiracy) यानी भारत की छवि को वैश्विक स्तर पर धूमिल करने की गहरी साजिश का अंदेशा जताया है।

क्या हुआ था भारत मंडपम के अंदर?

20 फरवरी 2026 को समिट के आखिरी दिन, हॉल नंबर 5 में अचानक हलचल मच गई। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए वैध पास लेकर घुसे करीब 10-15 युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपनी शर्ट उतार दी। उनके शरीर पर और हाथों में लिए हुए सफेद टी-शर्ट्स पर “PM is compromised” और “India-US Trade Deal” जैसे विवादित नारे लिखे थे।

प्रदर्शनकारियों ने ‘एप्स्टीन फाइल्स’ (Epstein Files) और भारत-अमेरिका व्यापार समझौतों का हवाला देते हुए पीएम मोदी पर देश के हितों के साथ समझौता करने का आरोप लगाया। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत दखल देते हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन ले गए।

दिल्ली पुलिस का चौंकाने वाला दावा: ‘नेपाल-स्टाइल’ विरोध और विदेशी कनेक्शन

इस मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के दौरान बेहद गंभीर दावे किए हैं:

  1. ग्लोबल डिफेमेशन साजिश: पुलिस का आरोप है कि यह विरोध प्रदर्शन स्वतःस्फूर्त (Spontaneous) नहीं था, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और प्रधानमंत्री की छवि खराब करने के लिए डिजाइन किया गया था।
  2. विदेशी विरोध का पैटर्न: जांचकर्ताओं ने बताया कि प्रदर्शन का तरीका हाल ही में नेपाल में हुए युवा विरोध प्रदर्शनों से मिलता-जुलता है। पुलिस को संदेह है कि यह एक ‘कोऑर्डिनेटेड पैटर्न’ का हिस्सा है जिसे विदेशी ताकतों द्वारा हवा दी जा रही है।
  3. फंडिंग की जांच: पुलिस ने कोर्ट से आरोपियों की रिमांड मांगते हुए कहा कि उनके मोबाइल फोन से विदेशी फंडिंग और बड़े नेटवर्क के लिंक मिल सकते हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन युवाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर हंगामा करने के लिए विशेष निर्देश मिले थे।

सियासी घमासान: BJP बनाम कांग्रेस

इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

  • बीजेपी का कड़ा प्रहार: भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस प्रदर्शन को ‘चरित्रहीन और बुद्धिहीन’ करार दिया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस के लिए AI का मतलब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नहीं, बल्कि ‘Anti-India’ है।” भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि जब दुनिया सुंदर पिचाई और सैम ऑल्टमैन जैसे दिग्गजों की मौजूदगी में भारत की तारीफ कर रही है, तब राहुल गांधी के इशारे पर कांग्रेस देश का अपमान कर रही है।
  • युवा कांग्रेस का बचाव: IYC के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने इस विरोध को जायज ठहराया। उन्होंने कहा कि “PM is compromised” केवल एक नारा नहीं, बल्कि देश के करोड़ों बेरोजगार युवाओं का गुस्सा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के साथ हुआ ट्रेड डील किसानों और छोटे व्यापारियों के हितों के खिलाफ है।

Bharat-VISTAAR और ‘MANAV’ विजन पर असर?

यह विरोध प्रदर्शन उस समय हुआ जब प्रधानमंत्री ने समिट में भारत का MANAV (मानव) विजन और Bharat-VISTAAR पहल पेश की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विरोध प्रदर्शन से निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है। हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा में हुई इस चूक की गहराई से जांच होगी और ऐसी किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा जो राष्ट्रीय गरिमा को ठेस पहुंचाए।

निष्कर्ष: लोकतंत्र या छवि बिगाड़ने का खेल?

लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ‘शर्टलेस’ प्रदर्शन और विदेशी पैटर्न का इस्तेमाल कई सवाल खड़े करता है। क्या यह वास्तव में बेरोजगारी और ट्रेड डील के खिलाफ आवाज थी, या फिर दिल्ली पुलिस के दावों के मुताबिक, भारत को वैश्विक पटल पर नीचा दिखाने की कोई बड़ी योजना? इसका पता तो पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट के बाद ही चलेगा।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. भारत मंडपम में प्रदर्शन का मुख्य कारण क्या था?

युवा कांग्रेस ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) और बेरोजगारी को लेकर विरोध जताया और पीएम मोदी पर ‘compromised’ होने का आरोप लगाया।

2. दिल्ली पुलिस ने इसे साजिश क्यों कहा?

पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन का तरीका नेपाल के विरोध प्रदर्शनों जैसा था और इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने भारत की छवि खराब करना था।

3. क्या प्रदर्शनकारी कानूनी तौर पर अंदर घुसे थे?

हाँ, प्राथमिक जांच के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने सामान्य नागरिक के तौर पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया था और उनके पास वैध क्यूआर कोड वाले पास थे।

4. इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?

दिल्ली पुलिस ने 4 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है और कोर्ट में उनकी रिमांड मांगते हुए विदेशी फंडिंग और बड़े नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है।