नई दिल्ली: राजधानी के भव्य भारत मंडपम में आयोजित छह दिवसीय ‘India AI Impact Summit 2026’ का शनिवार को शानदार समापन हुआ। इस समिट का सबसे बड़ा परिणाम “नई दिल्ली घोषणापत्र” (New Delhi Declaration on AI Impact) के रूप में सामने आया, जिस पर अमेरिका, चीन, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ सहित 89 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने हस्ताक्षर किए हैं।
यह समझौता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य को लेकर एक वैश्विक सहमति दर्शाता है, जिसका मूल मंत्र भारत का प्राचीन विचार “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” (सबका कल्याण, सबकी खुशी) है।
नई दिल्ली घोषणापत्र: AI के ‘7 चक्र’ और ‘3 सूत्र’
भारत ने इस समिट के जरिए दुनिया को AI विकास का एक अनूठा ढांचा दिया है। घोषणापत्र को मुख्य रूप से 3 सूत्रों (People, Planet, Progress) और 7 चक्रों (Pillars) पर आधारित किया गया है:
घोषणापत्र के 7 मुख्य स्तंभ (Chakras):
- मानव पूंजी विकास (Human Capital): AI क्षेत्र में कुशल कार्यबल तैयार करना।
- सामाजिक अधिकारिता (Social Empowerment): शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि में AI का लाभ पहुँचाना।
- सुरक्षित और विश्वसनीय AI (Safe & Trusted AI): डीपफेक और भ्रामक सूचनाओं के खिलाफ मजबूत तंत्र।
- ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency): कम बिजली खपत वाले AI मॉडल का विकास।
- विज्ञान में AI (AI for Science): रिसर्च और डिस्कवरी को गति देना।
- संसाधनों का लोकतांत्रीकरण (Democratizing AI Resources): तकनीक को कुछ चुनिंदा कंपनियों के बजाय सबके लिए सुलभ बनाना।
- आर्थिक विकास (Economic Growth): AI को जीडीपी ग्रोथ का इंजन बनाना।
PM मोदी का ‘MANAV’ विजन और ‘Sovereign AI’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट के दौरान ‘MANAV’ (मानव) फ्रेमवर्क पेश किया, जिसे दुनिया भर के नेताओं ने सराहा।
- M (Moral): नैतिक मूल्य।
- A (Accountable): जवाबदेह शासन।
- N (National Sovereignty): डेटा संप्रभुता (Whose data, his right)।
- A (Accessible): सबकी पहुँच में।
- V (Valid): कानूनी रूप से वैध।
सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत केवल AI का “उपभोक्ता” नहीं रहेगा, बल्कि Sovereign AI के माध्यम से अपनी खुद की कंप्यूटिंग शक्ति और स्वदेशी भाषा मॉडल (जैसे Sarvam AI) विकसित करेगा।
$250 बिलियन का निवेश और ‘Global South’ की आवाज
केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस समिट के दौरान केवल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में $250 बिलियन (लगभग 21 लाख करोड़ रुपये) के निवेश प्रस्ताव मिले हैं।
- 5 लाख से ज्यादा विजिटर्स: इस समिट ने G20 के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया।
- Global South का नेतृत्व: भारत ने उन देशों की आवाज उठाई जो तकनीक की दौड़ में पीछे छूट रहे हैं। घोषणापत्र में ‘लोकतांत्रिक प्रसार’ (Democratic Diffusion) की बात कही गई है ताकि AI का डेटा और प्रोसेसिंग पावर गरीब देशों को भी सस्ती दरों पर मिल सके।
चुनौतियां: बेरोजगारी और ऊर्जा का संकट
समिट में केवल फायदों पर ही नहीं, बल्कि चुनौतियों पर भी गंभीर चर्चा हुई।
- नौकरियों पर असर: विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि AI से कई क्षेत्रों में नौकरियां प्रभावित होंगी, जिसके लिए ‘री-स्किलिंग’ (Reskilling) का रोडमैप तैयार किया गया है।
- बिजली की भारी खपत: डेटा सेंटर्स द्वारा उपयोग की जाने वाली बिजली और पानी पर चिंता जताई गई, जिसके समाधान के लिए ‘Green AI’ की पहल शुरू की गई है।
निष्कर्ष: एक नई वैश्विक तकनीकी व्यवस्था
India AI Impact Summit 2026 ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब वैश्विक तकनीकी नीतियों (Global Tech Norms) का केवल अनुयायी नहीं, बल्कि निर्माता (Rule Maker) है। ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ इस बात का प्रमाण है कि दुनिया अब AI को केवल मुनाफे के चश्मे से नहीं, बल्कि मानवीय कल्याण के नजरिए से देखने को तैयार है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. नई दिल्ली घोषणापत्र (New Delhi Declaration) क्या है?
यह एक स्वैच्छिक और गैर-बाध्यकारी समझौता है जिसमें 89 देशों ने AI को सुरक्षित, पारदर्शी और सबके लिए सुलभ बनाने की प्रतिबद्धता जताई है।
2. क्या चीन और अमेरिका दोनों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं?
हाँ, यह भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत है कि AI प्रतिद्वंद्वी होने के बावजूद अमेरिका और चीन दोनों ने भारत के इस विजन का समर्थन किया है।
3. ‘Charter for Democratic Diffusion of AI’ क्या है?
यह एक ढांचा है जिसका उद्देश्य दुनिया भर में AI संसाधनों (जैसे GPU और डेटासेट) तक सस्ती पहुँच सुनिश्चित करना है, ताकि तकनीक का एकाधिकार खत्म हो सके।
4. समिट में निवेश को लेकर क्या बड़ी घोषणा हुई?
आईटी मंत्री के अनुसार, वैश्विक कंपनियों और निवेशकों ने भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए $250 बिलियन के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।








