नई दिल्ली/वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित अंतरिम ट्रेड डील (Interim Trade Deal) पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए नए 15% वैश्विक टैरिफ और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक बड़े झटके के बाद, दोनों देशों ने अपने मुख्य वार्ताकारों (Chief Negotiators) की बैठक को फिलहाल स्थगित कर दिया है।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल, जिसका नेतृत्व वाणिज्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव दर्पण जैन कर रहे थे, रविवार को वॉशिंगटन के लिए रवाना होने वाला था। लेकिन अंतिम समय में इस दौरे को री-शेड्यूल किया गया है। अब दोनों पक्ष नई स्थितियों का आकलन करने के बाद ही अगली मेज पर बैठेंगे।
क्यों टली वार्ता? ‘सुप्रीम’ फैसले और ट्रंप की जिद की पूरी कहानी
इस पूरी हलचल के पीछे दो मुख्य कारण हैं:
1. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ‘हंटर’
शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका देते हुए उनके ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ (Reciprocal Tariffs) को असंवैधानिक घोषित कर दिया। कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति IEEPA (1977) कानून का इस्तेमाल करके दुनिया भर पर भारी टैरिफ नहीं थोप सकते। इससे भारत पर लगने वाला प्रभावी टैरिफ जो 50% तक पहुँच गया था, तकनीकी रूप से गिरकर 8% के करीब आ गया था।
2. ट्रंप का ‘सेक्शन 122’ वाला पलटवार
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के 24 घंटे के भीतर, ट्रंप ने हार मानने के बजाय ‘ट्रेड एक्ट 1974’ के सेक्शन 122 का इस्तेमाल कर नया आदेश जारी कर दिया। उन्होंने सभी देशों से आयात होने वाले सामान पर 15% का फ्लैट ‘इम्पोर्ट सरचार्ज’ लगा दिया। यह नया टैरिफ 150 दिनों के लिए प्रभावी है।
विशेषज्ञों का कहना है: “जब ट्रंप ने पूरे विश्व के लिए 15% टैरिफ तय कर दिया, तो भारत के साथ जो 18% वाली डील हो रही थी, उसका आधार ही खत्म हो गया। अब भारत को बिना किसी रियायत के ही 15% टैरिफ मिल रहा है, तो हम पुरानी डील पर साइन क्यों करें?”
भारत के लिए ‘राहत’ या ‘आफत’? गणित समझिए
भारतीय निर्यातकों के लिए यह स्थिति किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं है:
- अगस्त 2025 की स्थिति: भारत पर 50% तक टैरिफ (रूसी तेल खरीदने की पेनाल्टी के साथ) लग रहा था।
- फरवरी 2026 (डील का ड्राफ्ट): भारत और अमेरिका 18% टैरिफ पर राजी हुए थे।
- आज की स्थिति: नए आदेश के बाद अब भारत को केवल 15% टैरिफ देना होगा।
फायदा: जेम्स एंड ज्वेलरी और टेक्सटाइल जैसे सेक्टर के लिए यह 15% का रेट राहत भरा है क्योंकि यह पिछले साल के मुकाबले बहुत कम है।
नुकसान: व्यापार वार्ता में भारत के पास जो ‘लीवरेज’ (Leverage) था, वह कम हो गया है। अब अमेरिका भारत से और अधिक रियायतें मांग सकता है।
प्रमुख सेक्टर्स पर असर: कौन जीतेगा, कौन हारेगा?
| सेक्टर (Sector) | असर (Impact) | वजह (Reason) |
| जेम्स एंड ज्वेलरी | ✅ राहत | भारी टैरिफ हटने से निर्यात फिर से बढ़ने की उम्मीद है। |
| टेक्सटाइल (कपड़ा) | ⚠️ अनिश्चितता | अमेरिका भारत का सबसे बड़ा मार्केट है, 15% टैरिफ से कीमतें बढ़ सकती हैं। |
| स्टील और एल्युमीनियम | ❌ नकारात्मक | इन पर पुराने भारी टैरिफ अभी भी लागू रहेंगे (सेक्शन 232 के तहत)। |
| एग्रीकल्चर (खेती) | ✅ सुरक्षित | कई कृषि उत्पादों को नए 15% सरचार्ज से छूट दी गई है। |
वाणिज्य मंत्रालय की रणनीति: अब आगे क्या?
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिया है कि भारत जल्दबाजी में कोई समझौता नहीं करेगा। भारत के पास डील के ड्राफ्ट में एक ‘क्लॉज’ है जो कहता है कि यदि अमेरिका अपनी टैरिफ नीति बदलता है, तो भारत भी अपनी प्रतिबद्धताओं (Commitments) को बदल सकता है।
भारतीय अधिकारी अब यह देख रहे हैं कि:
- क्या यह 15% टैरिफ 150 दिनों के बाद भी जारी रहेगा?
- क्या अमेरिका भारत को इस 15% से भी नीचे (जैसे 10% या 0%) ला सकता है?
- भारत को अपने मार्केट एक्सेस (Market Access) के वादों में कितनी कटौती करनी चाहिए?
निष्कर्ष: एक नई ‘ट्रेड वॉर’ की आहट?
भारत-अमेरिका व्यापार संबंध अब एक अनजान मोड़ पर हैं। जहाँ भारत अपनी ‘डेटा संप्रभुता’ और ‘स्थानीय विनिर्माण’ को बचाना चाहता है, वहीं ट्रंप का ‘अमेरिका फर्स्ट’ विजन हर कीमत पर व्यापार घाटा कम करने पर आमादा है। वार्ता का स्थगित होना इस बात का प्रमाण है कि भारत अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक और सोची-समझी कूटनीति अपना रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. भारत-अमेरिका ट्रेड डील क्यों टली?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पुराने टैरिफ रद्द कर दिए और ट्रंप ने नए 15% टैरिफ लगा दिए, जिससे पुरानी वार्ता की शर्तें अप्रासंगिक हो गईं।
2. सेक्शन 122 (Section 122) क्या है?
यह अमेरिकी कानून का वह हिस्सा है जो राष्ट्रपति को अंतरराष्ट्रीय भुगतान असंतुलन को ठीक करने के लिए 150 दिनों तक 15% तक टैरिफ लगाने की शक्ति देता है।
3. क्या ट्रंप के टैरिफ से भारत को फायदा होगा?
अल्पकालिक रूप से हाँ, क्योंकि 18% (प्रस्तावित) या 50% (पुराना) के मुकाबले 15% टैरिफ कम है। लेकिन दीर्घकालिक रूप से यह निर्यातकों के लिए अनिश्चितता पैदा करता है।
4. अगली बैठक कब होगी?
अभी कोई नई तारीख तय नहीं की गई है। दोनों देशों के अधिकारी फिलहाल नए कानूनी ढांचे का अध्ययन कर रहे हैं।








