कंबोडिया में ‘फर्जी भारतीय थाना’ सील: गांधी जी की फोटो और पुलिस की वर्दी पहनकर चल रहा था ‘डिजिटल अरेस्ट’ का काला धंधा!

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नई दिल्ली/नोम पेन्ह | 13 फरवरी 2026: ऑनलाइन ठगी की दुनिया में ‘डिजिटल अरेस्ट’ आज सबसे बड़ा खौफ बन चुका है। हाल ही में कंबोडिया के कंपोट प्रांत (Kampot Province) में हुई एक बड़ी कार्रवाई ने इस अंतरराष्ट्रीय रैकेट की पोल खोल दी है। कंबोडियाई पुलिस ने एक ऐसे स्कैम हब पर छापा मारा है, जहाँ से भारतीय नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा था। इस छापेमारी में फेक भारतीय पुलिस की वर्दी, सीबीआई (CBI) के लोगो, तिरंगा झंडा और यहाँ तक कि महात्मा गांधी की तस्वीरें बरामद हुई हैं, जिनका इस्तेमाल वीडियो कॉल पर लोगों को डराने के लिए किया जाता था।

1. कंबोडियाई छापेमारी: 200 केंद्र सील, हजारों स्कैमर्स फरार

कंबोडिया की सरकार ने अंतरराष्ट्रीय दबाव और भारत के गृह मंत्रालय (MHA) के इनपुट्स के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन चलाया है।

  • हैरान करने वाले आंकड़े: अधिकारियों के अनुसार, लगभग 190 ठगी केंद्रों को सील कर दिया गया है।
  • बड़ी गिरफ्तारी: इस ऑपरेशन में 173 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 11,000 से अधिक कर्मचारियों को डिपोर्ट (Deport) किया गया है।
  • पुलिस की कमी: छापेमारी के दौरान लगभग 6,000 से 7,000 स्कैमर्स मौके से भागने में सफल रहे क्योंकि वहां स्थानीय पुलिस की संख्या काफी कम थी।

2. कैसे काम करता था यह ‘फर्जी थाना’? (Modus Operandi)

यह स्कैमर्स केवल कॉल नहीं करते थे, बल्कि उन्होंने पूरा एक ‘वर्चुअल स्टूडियो’ बना रखा था जो देखने में हूबहू किसी भारतीय पुलिस स्टेशन या सीबीआई दफ्तर जैसा लगता था।

  • विजुअल सेटअप: वीडियो कॉल के बैकग्राउंड में महात्मा गांधी और डॉ. अंबेडकर की तस्वीरें लगाई गई थीं। मेज पर तिरंगा झंडा रखा होता था ताकि शिकार को यकीन हो जाए कि वह असली अधिकारियों से बात कर रहा है।
  • डराने की तकनीक: स्कैमर्स खुद को पुलिस या कस्टम अधिकारी बताकर कॉल करते हैं और दावा करते हैं कि आपके नाम से आए किसी पार्सल में ड्रग्स या अवैध हथियार मिले हैं।
  • आइसोलेशन (Isolation): वे पीड़ित को डराकर उसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लेते हैं, यानी उसे कॉल काटने या किसी को बताने से मना कर दिया जाता है और घंटों तक वीडियो निगरानी में रखा जाता है।

3. ‘डिजिटल अरेस्ट’ क्या है और भारत में इसका प्रभाव?

भारत में पिछले एक साल में डिजिटल अरेस्ट के मामलों में 400% की बढ़ोतरी देखी गई है।

  • वित्तीय नुकसान: गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025 के पहले पांच महीनों में ही भारतीयों ने डिजिटल स्कैम में लगभग ₹7,000 करोड़ गंवाए हैं।
  • मानसिक प्रताड़ना: यह केवल पैसा नहीं छीनते, बल्कि पीड़ित को इस कदर डरा देते हैं कि कई मामलों में लोगों ने आत्महत्या तक कर ली है।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम: मुख्य लक्षण और रेड फ्लैग्स

लक्षणसच्चाई क्या है?
वीडियो कॉल पर पूछताछभारतीय पुलिस या जांच एजेंसियां कभी भी व्हाट्सएप या स्काइप पर पूछताछ नहीं करतीं।
पैसे की मांगकोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर ‘निपटारा’ करने के लिए पैसे नहीं मांगती।
डिजिटल अरेस्ट का नामभारतीय कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई शब्द या प्रावधान नहीं है।
गोपनीयता की शर्तअसली पुलिस आपको परिवार या वकील से बात करने से कभी नहीं रोकेगी।

4. अगर आपके पास ऐसा कॉल आए, तो क्या करें?

साइबर एक्सपर्ट्स और सरकार (CyberDost) ने कुछ सख्त नियम बताए हैं:

  1. पैनिक न हों: कॉल आते ही घबराएं नहीं। याद रखें, पुलिस कभी भी आपको डिजिटल तरीके से गिरफ्तार नहीं कर सकती।
  2. कॉल काट दें: यदि कोई खुद को अधिकारी बताकर डराए, तो तुरंत कॉल काट दें और उस नंबर को ब्लॉक करें।
  3. हेल्पलाइन 1930: तुरंत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
  4. बैंक को सूचित करें: यदि आपने गलती से पैसा ट्रांसफर कर दिया है, तो पहले 2 घंटों के भीतर (Golden Hour) अपने बैंक को बताएं ताकि ट्रांजेक्शन को रोका जा सके।

5. कंबोडिया में भारतीयों की ‘साइबर गुलामी’

जांच में यह भी सामने आया है कि इन केंद्रों में काम करने वाले कई भारतीय युवा खुद शिकार हैं। उन्हें ‘डाटा एंट्री जॉब’ के बहाने कंबोडिया, म्यांमार और लाओस ले जाया जाता है, उनके पासपोर्ट छीन लिए जाते हैं और उन्हें जबरन भारतीयों को ही ठगने के काम में लगा दिया जाता है। इसे ‘Cyber Slavery’ कहा जा रहा है।

निष्कर्ष: सतर्कता ही सुरक्षा है

कंबोडिया में हुई यह कार्रवाई एक बड़ी जीत है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। ठग अब नए-नए तरीके अपना रहे हैं। जब तक लोग जागरूक नहीं होंगे, ये सिंडिकेट फलते-फूलते रहेंगे। गांधी जी की तस्वीर या पुलिस की वर्दी देखकर डरें नहीं, बल्कि कानून की सही जानकारी रखें।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या सीबीआई या पुलिस वीडियो कॉल पर अरेस्ट वारंट दिखा सकती है?

नहीं, गिरफ्तारी की एक कानूनी प्रक्रिया होती है जिसमें पुलिस को शारीरिक रूप से उपस्थित होना पड़ता है और वारंट की हार्ड कॉपी दिखानी होती है।

Q2. डिजिटल अरेस्ट स्कैम में सबसे ज्यादा किसे निशाना बनाया जाता है?

अक्सर रिटायर हो चुके वरिष्ठ नागरिकों और ऐसे लोगों को निशाना बनाया जाता है जो तकनीक के बारे में कम जानते हैं लेकिन कानून का सम्मान करते हैं।

Q3. क्या कंबोडिया से भारतीयों को वापस लाया जा रहा है?

हाँ, भारत का विदेश मंत्रालय (MEA) और कंबोडियाई दूतावास मिलकर उन भारतीयों को रेस्क्यू कर रहे हैं जिन्हें वहां जबरन काम पर रखा गया था।