दिल्ली में खौफनाक शुरुआत: 2026 के पहले 15 दिनों में 800+ लोग लापता; गायब होने वालों में 500 से अधिक महिलाएं

Delhi Missing Persons Data 2026

नई दिल्ली | 04 फरवरी 2026: दिल्ली पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो राजधानी में रहने वालों की रातों की नींद उड़ा सकती है। 1 जनवरी से 15 जनवरी 2026 के बीच, दिल्ली से कुल 807 लोगों के लापता होने की शिकायतें दर्ज की गई हैं। इसका मतलब है कि दिल्ली में हर दिन औसतन 54 लोग रहस्यमय तरीके से गायब हो रहे हैं।

महिलाओं और लड़कियों पर सबसे ज्यादा खतरा

डेटा का सबसे भयावह पहलू यह है कि लापता होने वालों में लगभग दो-तिहाई (63%) महिलाएं और लड़कियां हैं।

  • कुल लापता महिलाएं/लड़कियां: 509
  • कुल लापता पुरुष: 298

यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

लापता होने वालों का वर्गीकरण: बच्चे और वयस्क

पुलिस डेटा के अनुसार, लापता लोगों को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:

1. नाबालिग (Minors) – बच्चों की सुरक्षा पर संकट

पहले 15 दिनों में 191 नाबालिग गायब हुए, यानी हर दिन 13 बच्चे घर वापस नहीं लौटे।

  • लड़कियां: 146
  • लड़के: 45
  • किशोर (12-18 साल): इस श्रेणी में 169 किशोर लापता हुए, जिनमें 138 लड़कियां शामिल थीं। चिंता की बात यह है कि इनमें से 71% किशोर अभी भी लापता हैं।

2. वयस्क (Adults)

लापता लोगों में सबसे बड़ी संख्या वयस्कों की है।

  • कुल वयस्क: 616
  • महिलाएं: 363 | पुरुष: 253
  • इनमें से पुलिस ने 181 लोगों (90 पुरुष और 91 महिला) को ढूंढ निकाला है, लेकिन 435 अब भी लापता हैं।

तुलनात्मक विश्लेषण: 2025 बनाम 2026

दिल्ली में लापता होने का यह सिलसिला नया नहीं है, लेकिन इसकी गति डराने वाली है।

समयावधिकुल लापता मामलेमहिलाओं की संख्याअनसुलझे मामले
साल 2025 (पूरा वर्ष)24,50814,870 (60%)9,087
जनवरी 2026 (15 दिन)807509 (63%)572

एक दशक का डरावना सच: पिछले 10 वर्षों (2016-2026) में दिल्ली से कुल 2,32,737 लोग लापता हुए हैं। हालांकि पुलिस ने 1.8 लाख लोगों को खोज लिया, लेकिन लगभग 52,000 मामले आज भी अनसुलझे हैं।

क्यों गायब हो रहे हैं इतने लोग?

विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इन लापता मामलों के पीछे कई संभावित कारण बताए हैं:

  • मानव तस्करी (Human Trafficking): महिलाओं और बच्चों को अक्सर तस्करी गिरोहों द्वारा निशाना बनाया जाता है।
  • घरेलू कलह: कई मामलों में लोग घरेलू विवाद या तनाव के कारण घर छोड़ देते हैं।
  • रोजगार का झांसा: बाहरी राज्यों से आने वाले लोग अक्सर बेहतर काम के बहाने धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं।
  • मानसिक स्वास्थ्य: बुजुर्गों या मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों का रास्ता भटक जाना भी एक कारण है।

पुलिस की कार्रवाई और चुनौतियां

दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि वे लापता लोगों को खोजने के लिए ‘ऑपरेशन मिलाप’ जैसे विशेष अभियान चला रहे हैं। हालांकि, हर दिन दर्ज होने वाली 54 नई शिकायतों के कारण पुलिस के पास संसाधनों की कमी और जांच का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

“हम सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल ट्रैकिंग और इंटर-स्टेट कोऑर्डिनेशन के जरिए लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। नाबालिगों और महिलाओं के मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।” — दिल्ली पुलिस प्रवक्ता

निष्कर्ष: क्या दिल्ली सुरक्षित है?

800 से ज्यादा लोगों का महज 15 दिनों में गायब होना किसी बड़ी सामाजिक त्रासदी से कम नहीं है। यह आंकड़े केवल नंबर नहीं हैं, बल्कि उन परिवारों का दर्द है जो अपने अपनों की राह देख रहे हैं। प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी नेटवर्क को और अधिक सुदृढ़ करने के साथ-साथ इन लापता होने की वजहों की तह तक जाने की आवश्यकता है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. यदि कोई लापता हो जाए तो सबसे पहले क्या करें?

बिना किसी ‘वेटिंग पीरियड’ के तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन जाकर FIR (जीरो एफआईआर) दर्ज कराएं।

Q2. लापता लोगों की तलाश में कौन मदद कर सकता है?

पुलिस के अलावा आप Childline (1098) और महिला हेल्पलाइन (181) की मदद ले सकते हैं।

Q3. क्या दिल्ली पुलिस लापता लोगों के लिए कोई पोर्टल चलाती है?

हाँ, दिल्ली पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर लापता व्यक्तियों (ZIPNET) का डेटा उपलब्ध रहता है जहाँ फोटो के साथ जानकारी देखी जा सकती है।