बैंकॉक/नई दिल्ली | 03 फरवरी 2026: भारतीय बैडमिंटन के आकाश में एक नया सितारा चमक उठा है। हरियाणा की रहने वाली 20 वर्षीय देविका सिहाग ने बैंकॉक में आयोजित थाईलैंड मास्टर्स 2026 के महिला एकल (Women’s Singles) का खिताब जीतकर खेल जगत को चौंका दिया है। यह देविका का पहला BWF सुपर 300 (Super 300) खिताब है, जिसने उन्हें दिग्गज साइना नेहवाल और पीवी सिंधु जैसी श्रेणियों में खड़ा कर दिया है।
फाइनल मैच का रोमांच: जब किस्मत ने दिया प्रतिभा का साथ
रविवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में देविका सिहाग का सामना पूर्व विश्व चैंपियन और शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी से था। मैच की शुरुआत से ही देविका ने आक्रामक रुख अपनाया:
- पहला सेट: देविका ने अपनी जादुई प्लेसमेंट और सटीक स्मैश के दम पर पहला सेट 21-18 से अपने नाम किया।
- दूसरा सेट: दूसरे सेट में मुकाबला कांटे का था और स्कोर 11-9 पर था, तभी विपक्षी खिलाड़ी को पैर में गंभीर चोट (Injury) लगी।
- रिटायरमेंट: चोट के कारण विपक्षी खिलाड़ी ने मैच के बीच में ही हटने (Retired Hurt) का फैसला किया, जिसके बाद अंपायर ने देविका सिहाग को आधिकारिक रूप से विजेता घोषित कर दिया।
भले ही जीत तकनीकी आधार पर मिली हो, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में देविका का प्रदर्शन किसी चैंपियन से कम नहीं था। उन्होंने सेमीफाइनल में भी तीसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी को हराकर उलटफेर किया था।
कौन हैं देविका सिहाग? (The Rise of a Champion)
देविका का सफर आसान नहीं रहा है। हरियाणा के छोटे से गांव से निकलकर बैंकॉक के पोडियम तक का उनका रास्ता कड़ी मेहनत और त्याग से भरा है:
- प्रारंभिक शिक्षा: उन्होंने 8 साल की उम्र से ही रैकेट थाम लिया था। उनके पिता, जो खुद एक एथलीट रहे हैं, देविका के पहले कोच थे।
- प्रशिक्षण: देविका वर्तमान में पुलेला गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी में प्रशिक्षण ले रही हैं। कोच गोपीचंद का मानना है कि देविका की कोर्ट कवरेज और नेट प्ले उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाता है।
- पिछला रिकॉर्ड: 2025 में उन्होंने नेशनल चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था और कई अंतरराष्ट्रीय चैलेंजर्स (Challengers) में अपना लोहा मनवाया था।
भारतीय बैडमिंटन के लिए इसके क्या मायने हैं?
पीवी सिंधु और साइना नेहवाल के युग के बाद भारतीय महिला बैडमिंटन में एक खालीपन सा महसूस हो रहा था। देविका की यह जीत उस खालीपन को भरने की दिशा में एक बड़ा कदम है:
| पहलू | देविका सिहाग का प्रभाव |
| वर्ल्ड रैंकिंग | इस जीत के बाद देविका टॉप-20 में जगह बनाने के करीब पहुंच गई हैं। |
| ओलंपिक 2028 | देविका अब लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए भारत की सबसे बड़ी उम्मीदों में से एक हैं। |
| युवाओं के लिए प्रेरणा | उनकी जीत ने भारत के छोटे शहरों की लड़कियों को बैडमिंटन अपनाने के लिए प्रेरित किया है। |
अगला लक्ष्य: ऑल इंग्लैंड और वर्ल्ड चैंपियनशिप
खिताब जीतने के बाद भावुक देविका ने कहा:
“यह सपना सच होने जैसा है। मैं पिछले कई महीनों से अपनी फिटनेस पर काम कर रही थी। थाईलैंड में भारतीय प्रशंसकों का समर्थन अद्भुत था। अब मेरा पूरा ध्यान आगामी ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप और विश्व रैंकिंग में सुधार पर है।”
विशेषज्ञों की राय: “पीवी सिंधु की असली उत्तराधिकारी”
बैडमिंटन विशेषज्ञों का मानना है कि देविका की ऊंचाई और उनकी लंबी पहुंच (Reach) उन्हें पीवी सिंधु जैसा फायदा देती है। उनके ‘क्रॉस-कोर्ट स्मैश’ दुनिया के किसी भी खिलाड़ी के लिए सिरदर्द बन सकते हैं। भारतीय खेल मंत्रालय ने भी देविका को इस शानदार उपलब्धि के लिए बधाई दी है और भविष्य के टूर्नामेंट्स के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।
निष्कर्ष: एक नए युग का आगाज़
थाईलैंड मास्टर्स 2026 की जीत केवल एक ट्रॉफी नहीं है, बल्कि यह देविका सिहाग के आत्मविश्वास का प्रमाण है। भारत को एक ऐसी खिलाड़ी मिल गई है जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर किसी भी दिग्गज को चुनौती दे सकती है। बैडमिंटन प्रेमियों के लिए अब “सिंधु-साइना” के बाद “देविका” का नाम गर्व से लेने का समय आ गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. देविका सिहाग किस राज्य से संबंधित हैं?
देविका सिहाग हरियाणा राज्य से हैं और वर्तमान में हैदराबाद में प्रशिक्षण ले रही हैं।
Q2. BWF Super 300 खिताब का क्या महत्व है?
BWF वर्ल्ड टूर में सुपर 300 एक प्रतिष्ठित स्तर है। यहां जीतने से खिलाड़ी को महत्वपूर्ण रैंकिंग अंक मिलते हैं, जिससे उन्हें बड़े टूर्नामेंट्स (जैसे सुपर 1000 या ओलंपिक) में सीधे प्रवेश मिलता है।
Q3. थाईलैंड मास्टर्स 2026 का फाइनल स्कोर क्या था?
देविका ने पहला सेट 21-18 से जीता था और दूसरे सेट में 11-9 की बढ़त पर थीं जब उनकी प्रतिद्वंद्वी रिटायर हो गईं।







