भारत-बांग्लादेश संबंध: पड़ोसियों के बीच बढ़ती दूरियां और नई चुनौतियां:
नई दिल्ली / ढाका | 27 दिसंबर, 2025
भारत और बांग्लादेश के रिश्ते, जिन्हें कभी “सोनली अध्याय” (स्वर्णिम युग) कहा जाता था, आज एक बड़े संकट से गुजर रहे हैं। अगस्त 2024 में शेख हसीना के पद छोड़ने के बाद से दोनों देशों के बीच वह पुरानी दोस्ती और भरोसा कम होता दिख रहा है। वर्तमान में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार और भारत के बीच कई मुद्दों पर खींचतान जारी है।
विवाद की मुख्य वजहें
दोनों पड़ोसियों के बीच बढ़ती कड़वाहट के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं:
- शेख हसीना का मुद्दा: बांग्लादेश की नई सरकार चाहती है कि भारत पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को उन्हें सौंप दे ताकि उन पर कानूनी कार्रवाई की जा सके। वहीं, भारत ने उन्हें सुरक्षा और मानवीय आधार पर शरण दी है। यह कूटनीतिक विवाद का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है।
- अल्पसंख्यकों पर हमले: भारत ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के साथ हो रही हिंसा पर गहरी चिंता जताई है। चटगांव और मयमनसिंह जैसी जगहों पर हुई हिंसक घटनाओं ने दिल्ली को नाराज कर दिया है, जबकि ढाका इन खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया बताता है।
- धार्मिक तनाव और वीजा पाबंदी: कट्टरपंथी नेताओं की हत्या और भारत-विरोधी प्रदर्शनों के चलते दोनों देशों के बीच तनाव इतना बढ़ गया है कि भारत ने कई जगहों पर वीजा सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी हैं।
बदलता राजनीतिक माहौल
बांग्लादेश की राजनीति में अब तारिक रहमान और उनकी पार्टी BNP का प्रभाव बढ़ रहा है। 17 साल बाद उनकी वापसी ने भारत के लिए नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। भारत हमेशा से बांग्लादेश में एक स्थिर और शांतिपूर्ण सरकार का पक्षधर रहा है, लेकिन बदलती परिस्थितियों में वह फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है।
सुरक्षा और व्यापार पर संकट
इस आपसी विवाद का असर आम लोगों और देश की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है:
- पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा: बांग्लादेश की मदद से भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों (सेवन सिस्टर्स) में शांति बनी हुई थी। अब भारत को डर है कि कहीं वहां दोबारा उग्रवाद न बढ़ जाए।
- आवाजाही और व्यापार: ट्रेनों और बसों का चलना कम हो गया है। इससे व्यापार और उन लोगों को परेशानी हो रही है जो इलाज या काम के सिलसिले में एक देश से दूसरे देश जाते हैं।
आगे क्या होगा?
जानकारों का मानना है कि फरवरी 2026 में होने वाले चुनाव इस रिश्ते का भविष्य तय करेंगे। दोनों देशों के लिए जरूरी है कि वे बातचीत के जरिए विवाद सुलझाएं। बांग्लादेश अपनी आजादी और पहचान की बात कर रहा है, तो भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर चौकन्ना है।







