भारत-कनाडा संबंधों में ‘बर्फ’ पिघली: PM मार्क कार्नी की 10 दिवसीय यात्रा; क्या ₹5.8 लाख करोड़ (70B$) की ट्रेड डील देगी नई दिशा?

India-Canada Relations 2026

नई दिल्ली/मुंबई: अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कहा जाता है कि “कोई स्थायी दुश्मन नहीं होता, केवल स्थायी हित होते हैं।” पिछले कुछ वर्षों के तनावपूर्ण संबंधों के बाद, भारत और कनाडा के रिश्तों में आज एक नया और सकारात्मक अध्याय शुरू हुआ है। कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) अपनी पहली 10 दिवसीय आधिकारिक भारत यात्रा पर मुंबई पहुंच चुके हैं।

यह दौरा केवल एक कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (भारत) और उत्तर अमेरिकी पावरहाउस (कनाडा) के बीच रिश्तों को ‘Reset’ करने की एक सोची-समझी कोशिश है।

1. मुंबई से दिल्ली: कार्नी का ‘मिशन इंडिया’ शेड्यूल

मार्क कार्नी की यह यात्रा 26 फरवरी से 7 मार्च 2026 तक चलेगी। उनके कार्यक्रम के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • मुंबई (27-28 फरवरी): कार्नी देश की वित्तीय राजधानी में भारतीय और कनाडाई सीईओ, फिनटेक विशेषज्ञों और पेंशन फंड्स के प्रमुखों से मुलाकात करेंगे।
  • नई दिल्ली (1-2 मार्च): मुख्य आकर्षण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैदराबाद हाउस में होने वाली द्विपक्षीय बैठक है। यहाँ सुरक्षा, व्यापार और तकनीक पर ‘डेलिगेशन लेवल’ वार्ता होगी।
  • CEO फोरम: दोनों नेता भारत-कनाडा सीईओ फोरम को संबोधित करेंगे, जो व्यापारिक बाधाओं को दूर करने का काम करेगा।

2. ‘फ्रॉस्टी’ संबंधों से ‘फ्रेंडली’ ट्रेड तक: मुख्य एजेंडा

जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान निज्जर विवाद के कारण जो कड़वाहट आई थी, उसे कार्नी प्रशासन ने पीछे छोड़ने का संकेत दिया है।

$70 बिलियन का व्यापार लक्ष्य (CEPA)

दोनों देशों ने Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) पर बातचीत फिर से शुरू करने का फैसला किया है। लक्ष्य है कि साल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा $31 बिलियन से बढ़ाकर $70 बिलियन किया जाए।

क्लीन एनर्जी और क्रिटिकल मिनरल्स

भारत को अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के लिए यूरेनियम और बैटरी बनाने के लिए लिथियम व अन्य दुर्लभ खनिजों (Critical Minerals) की जरूरत है। कनाडा इन संसाधनों का भंडार है। इस यात्रा के दौरान एक बड़े ‘यूरेनियम सप्लाई समझौते’ पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।

AI और डिफेंस पार्टनरशिप

कनाडा की इंडो-पैसिफिक रणनीति में भारत एक ‘धुरी’ (Pivotal Partner) है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और रक्षा उत्पादन में नए जॉइंट वेंचर्स पर चर्चा इस दौरे का केंद्र रहेगी।

3. इमिग्रेशन और वर्क परमिट: 10 लाख भारतीयों की चिंता

लेख के SEO के लिहाज से यह हिस्सा सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि लाखों भारतीय छात्र और पेशेवर इस खबर पर नजर रखे हुए हैं।

  • 2026 इमिग्रेशन नियम: कनाडा ने हाल ही में एक्सप्रेस एंट्री के लिए नई श्रेणियां घोषित की हैं। कार्नी प्रशासन से उम्मीद है कि वे वर्क परमिट और पीआर (PR) नियमों में कुछ ढील देंगे, जो 2025 के अंत तक काफी सख्त हो गए थे।
  • कानूनी दर्जा: रिपोर्ट्स के अनुसार, 2026 में लगभग 10 लाख भारतीयों के लीगल स्टेटस पर तलवार लटकी है। कार्नी की पीएम मोदी के साथ बातचीत में ‘प्रतिभा पलायन’ (Talent Mobility) और वीजा सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा होगा।

4. क्यों जरूरी है यह ‘रिसेट’? (The Trump Factor)

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी और उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति ने वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। ट्रंप के नए टैरिफ (10-15%) से बचने के लिए कनाडा को भारत जैसे बड़े बाजार की सख्त जरूरत है। वहीं, भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कनाडा का निवेश चाहिए।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. मार्क कार्नी भारत क्यों आ रहे हैं?

मार्क कार्नी का उद्देश्य भारत के साथ खराब हुए कूटनीतिक रिश्तों को सुधारना और व्यापार, ऊर्जा व तकनीक के क्षेत्र में नए समझौतों पर हस्ताक्षर करना है।

2. क्या भारत-कनाडा के बीच अब तनाव खत्म हो गया है?

पूरी तरह से नहीं, लेकिन कार्नी प्रशासन ने पुराने विवादों (जैसे निज्जर केस) पर ‘व्यावहारिक’ रुख अपनाया है और भारत के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है।

3. इस यात्रा से भारतीय छात्रों को क्या फायदा होगा?

वीजा नियमों में स्पष्टता और वर्क परमिट की समय-सीमा बढ़ाने जैसे मुद्दों पर सकारात्मक बातचीत होने की उम्मीद है, जिससे छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो सके।