ट्रंप के ‘टैरिफ बम’ के बीच भारत का महा-धमाका: 27 जनवरी को EU के साथ होगी ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’!

India-EU Trade Deal 2026

नई दिल्ली/दावोस | शनिवार, 24 जनवरी 2026: दुनिया भर में डोनाल्ड ट्रंप के ‘टैरिफ राज’ को लेकर मची अफरा-तफरी के बीच भारत एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। भारत और 27 देशों वाला यूरोपीय संघ (EU) अपने महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच गए हैं।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ (सभी समझौतों की जननी) करार दिया है।

क्यों कहा जा रहा है इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’?

यह डील केवल व्यापार के बारे में नहीं है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था का भूगोल बदलने वाली है:

  • 2 अरब लोगों का बाजार: यह समझौता भारत और यूरोप को मिलाकर दुनिया का सबसे बड़ा साझा बाजार बनाएगा।
  • 25% ग्लोबल GDP: यह डील दुनिया की कुल जीडीपी के लगभग एक चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करेगी।
  • शतरंज की सुपर चाल: जब ट्रंप यूरोप और भारत दोनों पर भारी टैरिफ लगा रहे हैं, तब यह समझौता दोनों पक्षों के लिए एक ‘सुरक्षा कवच’ (Economic Shield) की तरह काम करेगा।

27 जनवरी: भारत और यूरोपीय संघ का मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA)

दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने साफ किया कि वह 25 से 27 जनवरी के बीच भारत दौरे पर रहेंगी। वह इस साल गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगी।

“हम एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते के मुहाने पर खड़े हैं। अभी कुछ तकनीकी बारीकियां बाकी हैं, लेकिन 27 जनवरी को इंडिया-ईयू समिट में इसकी घोषणा की प्रबल संभावना है।” – उर्सुला वॉन डेर लेयेन

ट्रंप टैरिफ बनाम इंडिया-ईयू दोस्ती: 3 मुख्य कारण

आखिर क्यों भारत और यूरोप को इस समय एक-दूसरे की सख्त जरूरत है?

1. ट्रंप का 50% टैरिफ का दबाव

डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाले सामानों पर 50% तक के टैरिफ लगा दिए हैं। ऐसे में भारत के लिए अपने निर्यात (Exports) को बचाने के लिए यूरोप से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। यूरोप पहले से ही भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है ($135 अरब से अधिक का व्यापार)।

2. जीएसपी (GSP) का झटका और रिकवरी

हाल ही में यूरोप ने भारत के 87% निर्यात पर जीएसपी (GSP) लाभ निलंबित कर दिए हैं, जिससे भारतीय कपड़ा और इंजीनियरिंग सामान महंगे हो गए हैं। प्रस्तावित FTA इन सभी बाधाओं को खत्म कर देगा और भारतीय सामान फिर से यूरोपीय बाजारों में सस्ते दाम पर मिलेंगे।

3. ‘मेक इन इंडिया’ को नई उड़ान

इस डील से ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल, ग्रीन एनर्जी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में यूरोपीय निवेश की बाढ़ आ सकती है। इससे भारत को चीन का एक मजबूत विकल्प बनने में मदद मिलेगी।

किन सेक्टर्स को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

सेक्टरसंभावित लाभ
टेक्सटाइल (Textiles)यूरोपीय ड्यूटी हटने से वियतनाम और बांग्लादेश के मुकाबले भारतीय कपड़े सस्ते होंगे।
फार्मा (Pharma)दवाइयों की मंजूरी की प्रक्रिया आसान होगी और निर्यात बढ़ेगा।
ऑटो पार्ट्सग्लोबल सप्लाई चेन में भारतीय कंपनियों की पैठ बढ़ेगी।
ग्रीन एनर्जीयूरोप से भारत को अत्याधुनिक हाइड्रोजन और सोलर तकनीक मिलेगी।

चुनौतियां अभी भी बरकरार?

हालांकि उत्साह चरम पर है, लेकिन कुछ संवेदनशील मुद्दे अभी भी मेज पर हैं:

  • कृषि और डेयरी: भारत अपने छोटे किसानों के हितों के लिए डेयरी और कृषि क्षेत्र को पूरी तरह खोलने के पक्ष में नहीं है।
  • कार्बन टैक्स (CBAM): यूरोप का नया कार्बन बॉर्डर टैक्स भारतीय स्टील और एल्युमीनियम निर्यातकों के लिए चिंता का विषय है।

निष्कर्ष: नए वैश्विक व्यवस्था की शुरुआत

यदि 27 जनवरी 2026 को इस समझौते पर मुहर लगती है, तो यह प्रधानमंत्री मोदी की ‘आर्थिक कूटनीति’ की सबसे बड़ी जीत होगी। यह समझौता दुनिया को संदेश देगा कि व्यापारिक धमकियों के दौर में भी सहयोग और खुला बाजार ही विकास का एकमात्र रास्ता है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या 27 जनवरी को डील फाइनल हो जाएगी?

पूरी संभावना है। यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं के भारत दौरे के दौरान इसकी आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।

Q2. ट्रंप के टैरिफ का इस डील पर क्या असर है?

ट्रंप की टैरिफ नीतियों ने भारत और यूरोप को एक-दूसरे के करीब आने के लिए मजबूर किया है ताकि वे अमेरिकी बाजार पर अपनी निर्भरता कम कर सकें।

Q3. आम आदमी को क्या फायदा होगा?

यूरोपीय तकनीक भारत आने से इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में कीमतें कम हो सकती हैं और लाखों नए रोजगार पैदा होंगे।