नई दिल्ली | 8 फरवरी 2026: भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) ने वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को स्पष्ट किया कि भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से $500 बिलियन (लगभग 45 लाख करोड़ रुपये) के सामान खरीदने के लिए पूरी तरह तैयार है। जहां सरकार इसे ‘मास्टरस्ट्रोक’ बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे देश के हितों के साथ समझौता करार दे रही है।
पीयूष गोयल का बड़ा बयान: “$500 बिलियन तो सिर्फ शुरुआत है”
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मीडिया से बात करते हुए उन दावों को खारिज कर दिया जिनमें इस डील को भारत के लिए घाटे का सौदा बताया जा रहा था।
- मामूली आंकड़ा: गोयल ने कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था अगले कुछ वर्षों में $2 ट्रिलियन (2 लाख करोड़ डॉलर) की मांग पैदा करेगी। ऐसे में $500 बिलियन का आयात कोई बड़ी बात नहीं है।
- आयात का विविधीकरण: भारत वर्तमान में दुनिया के अन्य देशों से जिन $300 बिलियन के सामानों का आयात कर रहा है (जैसे विमान, कोकिंग कोल, और ऊर्जा), उन्हें अब प्रतिस्पर्धी दरों पर अमेरिका से खरीदा जा सकता है।
- बोइंग और रक्षा सौदे: इसमें बोइंग विमानों के $80-100 बिलियन के मौजूदा ऑर्डर और इंजन व स्पेयर पार्ट्स की खरीद भी शामिल है।
बीजेपी बनाम कांग्रेस: राजनीतिक घमासान
इस समझौते ने देश में एक बड़े ‘राजनीतिक युद्ध’ को जन्म दे दिया है।
बीजेपी का पक्ष: “किसानों और MSMEs की बड़ी जीत”
सत्तारूढ़ दल ने इस डील को “फादर ऑफ ऑल डील्स” बताया है।
- टैरिफ में भारी कटौती: अमेरिकी बाजार में भारतीय सामानों पर लगने वाला टैरिफ 50% से घटकर 18% रह गया है।
- जीरो ड्यूटी एक्सेस: जेनेरिक दवाओं, रत्न-आभूषण और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों को अमेरिकी बाजार में बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के एंट्री मिलेगी।
- कृषि सुरक्षा: सरकार का दावा है कि डेयरी और संवेदनशील कृषि उत्पादों (गेहूं, चावल, चीनी) को इस डील से बाहर रखकर भारतीय किसानों के हितों की रक्षा की गई है।
विपक्ष का प्रहार: “नाम नरेंद्र, काम सरेंडर”
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तीखा हमला करते हुए कहा कि पीएम मोदी ने अमेरिकी दबाव के आगे घुटने टेक दिए हैं।
- रूसी तेल पर पाबंदी: विपक्ष का आरोप है कि अमेरिका अब भारत की तेल खरीद की “निगरानी” करेगा, जो भारत की संप्रभुता पर हमला है।
- डंपिंग ग्राउंड का डर: कांग्रेस का कहना है कि $500 बिलियन के आयात की शर्त भारत को अमेरिकी सामानों का ‘डंपिंग यार्ड’ बना देगी, जिससे घरेलू छोटे उद्योग (MSMEs) बर्बाद हो जाएंगे।
क्या भारतीय किसान सुरक्षित हैं? (Impact on Farmers)
यह इस डील का सबसे संवेदनशील पहलू है। समझौते के तहत भारत ने कुछ अमेरिकी उत्पादों (जैसे सूखे मेवे, सोयाबीन तेल और वाइन) पर टैरिफ कम किए हैं, लेकिन सरकार ने मुख्य खाद्य सुरक्षा उत्पादों को ‘रिंग-फेंस’ (Ring-fenced) कर दिया है।
| सुरक्षित उत्पाद (No Entry) | आयात की अनुमति (Reduced Tariff) |
| दूध, पनीर और घी (Dairy) | ट्री नट्स (बादाम, अखरोट) |
| गेहूं, चावल और मक्का | सोयाबीन तेल |
| पोल्ट्री और मांस उत्पाद | ताजे और प्रोसेस्ड फल |
| चीनी और दालें | वाइन और स्पिरिट्स |
निष्कर्ष: विकसित भारत की ओर एक कदम?
इसमें कोई दो राय नहीं है कि अमेरिका के साथ यह समझौता भारत के लिए ‘मेक इन इंडिया’ और ‘एक्सपोर्ट竞争力’ को बढ़ाने का बड़ा अवसर है। हालांकि, विपक्ष की चिंताओं और रूसी तेल पर अमेरिकी निगरानी जैसे कूटनीतिक पहलुओं पर सरकार को और अधिक स्पष्टता देनी होगी। $500 बिलियन का यह निवेश भारत को $35 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने के सपने की ओर ले जाता है या नहीं, यह आने वाले वर्षों में क्रियान्वयन (Implementation) पर निर्भर करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में टैरिफ दर क्या है?
भारतीय उत्पादों पर प्रभावी अमेरिकी टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है।
Q2. $500 बिलियन के सौदे में क्या-क्या शामिल है?
इसमें ऊर्जा उत्पाद (LNG), विमान (बोइंग), कोकिंग कोल, उच्च-तकनीकी उपकरण और कृषि उत्पाद शामिल हैं।
Q3. क्या भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है?
समझौते के तहत भारत ने ऊर्जा स्रोतों में विविधीकरण की बात कही है, लेकिन सरकार का कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा उनकी प्राथमिकता रहेगी।







