भारत-वेनेजुएला तेल सौदा: अमेरिका की हरी झंडी और रूस से दूरी; क्या अब सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?

India-Venezuela Oil Deal 2026

नई दिल्ली/वॉशिंगटन | 31 जनवरी 2026: वैश्विक राजनीति के शतरंज पर भारत ने एक और बड़ी चाल चली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने भारत को वेनेजुएला से कच्चा तेल (Crude Oil) खरीदने की अनुमति दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत पर रूस से तेल आयात कम करने का अमेरिकी दबाव बढ़ रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह “ऑयल स्वैप” भारत को न केवल सस्ता तेल दिलाएगा, बल्कि अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों में आई तल्खी (Tariffs) को भी कम करेगा।

क्यों अहम है वेनेजुएला के साथ यह डील?

वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है। भारत के लिए यह देश हमेशा से एक किफायती विकल्प रहा है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों (Sanctions) के कारण पिछले कुछ वर्षों में यह व्यापार ठप पड़ा था।

  1. रूसी तेल का विकल्प: यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने बड़े पैमाने पर रियायती रूसी तेल खरीदा, लेकिन अब अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने पर भारत पर भारी ‘टैरिफ’ लगाने की धमकी दी है। वेनेजुएला का तेल अब उस कमी को पूरा करेगा।
  2. रिलायंस और सरकारी कंपनियों को फायदा: रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के पास वेनेजुएला के ‘हैवी क्रूड’ को रिफाइन करने की आधुनिक तकनीक है। इस मंजूरी के बाद रिलायंस और IOC जैसी कंपनियों के शेयर में भी उछाल देखा गया है।
  3. यूएस-कंट्रोल्ड फ्रेमवर्क: अमेरिका ने इस बार तेल बेचने की अनुमति एक विशेष फ्रेमवर्क के तहत दी है, जिसमें तेल की बिक्री से होने वाली आय पर वाशिंगटन की निगरानी रहेगी, ताकि फंड का इस्तेमाल वेनेजुएला की जनता के कल्याण के लिए हो सके।

रूस बनाम वेनेजुएला: भारत का नया तेल गणित

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% तेल आयात करता है। आंकड़ों के नजरिए से देखें तो पिछले कुछ महीनों में रूसी तेल का हिस्सा भारत की कुल खरीद में गिरा है।

तेल स्रोतजनवरी 2025 (हिस्सा)जनवरी 2026 (अनुमानित हिस्सा)बदलाव का कारण
रूस35-40%20-22%अमेरिकी प्रतिबंध और पेमेंट चुनौतियां
वेनेजुएला0%6-8% (प्रस्तावित)अमेरिकी मंजूरी और भारी डिस्काउंट
मिडिल ईस्ट45%55%पारंपरिक भरोसेमंद सप्लायर

भारत पर अमेरिकी ‘टैरिफ’ का दबाव

अमेरिका ने हाल ही में भारत से आने वाले सामानों पर 50% तक टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी, क्योंकि भारत रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा था।

  • ट्रेड डील की उम्मीद: अमेरिकी ट्रेजरी सचिव ने संकेत दिया है कि यदि भारत रूसी तेल का आयात 10 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) से नीचे लाता है, तो टैरिफ में राहत दी जा सकती है।
  • वेनेजुएला का ट्रंप कार्ड: वेनेजुएला से तेल खरीदना अमेरिका के लिए राजनीतिक रूप से “स्वीकार्य विविधीकरण” (Acceptable Diversification) है। इससे रूस की आय घटेगी और भारत को ऊर्जा सुरक्षा मिलेगी।

वेनेजुएला में ‘मदुरो’ के बाद के हालात

जनवरी 2026 की शुरुआत में अमेरिकी कार्रवाई के बाद वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन की स्थिति बनी है। नई कार्यवाहक सरकार निजी निवेश के लिए अपने हाइड्रोकार्बन क्षेत्र को खोल रही है।

  • भारतीय निवेश: ONGC विदेश लिमिटेड (OVL) के वेनेजुएला में प्रोजेक्ट्स फंसे हुए थे, अब उनके दोबारा शुरू होने और वहां से बकाया लाभांश (Dividends) वापस मिलने की राह आसान हो गई है।

निष्कर्ष: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्या है इसके मायने?

भारत के लिए वेनेजुएला से तेल की वापसी एक ‘विन-विन’ स्थिति है। इससे न केवल कच्चे तेल की औसत लागत कम होगी, बल्कि अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव भी कम होगा। यदि यह डील पूरी तरह लागू होती है, तो आने वाले महीनों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में स्थिरता या मामूली गिरावट की उम्मीद की जा सकती है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या वेनेजुएला का तेल रूस के मुकाबले सस्ता है?

हाँ, वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल (Heavy Crude) आमतौर पर मार्केट रेट से काफी डिस्काउंट पर मिलता है, जो भारतीय रिफाइनरियों के लिए बहुत फायदेमंद है।

Q2. अमेरिका ने भारत को अनुमति क्यों दी?

अमेरिका चाहता है कि रूस की तेल से होने वाली कमाई कम हो। भारत को वेनेजुएला का विकल्प देकर अमेरिका रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करने की अपनी वैश्विक रणनीति को मजबूत कर रहा है।

Q3. क्या इससे भारत-रूस संबंधों पर असर पड़ेगा?

भारत अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। वह रूस से संबंध खत्म नहीं करेगा, लेकिन अपने स्रोतों में विविधता लाकर जोखिम कम कर रहा है।