नई दिल्ली | 04 फरवरी 2026: भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह कोई नई उड़ान नहीं बल्कि कानूनी पेचीदगियां हैं। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India – CCI) ने इंडिगो के खिलाफ कथित ‘अनुचित व्यापार प्रथाओं’ (Unfair Business Practices) के लिए आधिकारिक जांच शुरू कर दी है। यह मामला मुख्य रूप से दिसंबर 2025 में हुई उन हजारों फ्लाइट कैंसिलेशन से जुड़ा है, जिसने देश भर के यात्रियों को अधर में छोड़ दिया था।
क्या है पूरा विवाद? (The Core Issue)
दिसंबर के महीने में, जब पर्यटन सीजन अपने चरम पर था, इंडिगो ने परिचालन संबंधी कारणों (Operational Reasons) का हवाला देते हुए एक के बाद एक सैकड़ों उड़ानें रद्द की थीं। सीसीआई को मिली शिकायतों के अनुसार, इंडिगो पर निम्नलिखित आरोप लगाए गए हैं:
- मार्केट डोमिनेंस का दुरुपयोग: बाजार में अपनी मजबूत स्थिति का फायदा उठाते हुए यात्रियों को अंतिम समय पर विकल्प न देना।
- रिफंड में देरी: टिकट रद्द होने के बाद यात्रियों को समय पर रिफंड न देना या उन्हें केवल ‘क्रेडिट शेल’ (Credit Shell) लेने के लिए मजबूर करना।
- महंगे टिकट: रद्द की गई उड़ानों के वैकल्पिक रूट पर यात्रियों से सामान्य से 3-4 गुना अधिक किराया वसूलना।
- पारदर्शिता की कमी: उड़ानों के रद्द होने की स्पष्ट वजह न बताना और कस्टमर केयर सपोर्ट का निष्क्रिय होना।
CCI की जांच के दायरे में क्या होगा?
CCI के आदेश के अनुसार, महानिदेशक (DG) स्तर के अधिकारी इस मामले की जांच करेंगे। जांच का मुख्य केंद्र यह होगा कि क्या इंडिगो ने प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 (Competition Act, 2002) की धारा 3 या 4 का उल्लंघन किया है।
- बिंदु 1: क्या इंडिगो ने अन्य एयरलाइंस के साथ मिलकर किराए के दाम कृत्रिम रूप से बढ़ाए?
- बिंदु 2: क्या फ्लाइट कैंसिलेशन एक सोची-समझी रणनीति थी ताकि कम ऑक्यूपेंसी वाली उड़ानों को मिलाकर मुनाफा कमाया जा सके?
- बिंदु 3: उपभोक्ताओं को रिफंड के बदले वाउचर देने की नीति कितनी न्यायसंगत है?
दिसंबर का वो ‘ब्लैक आउट’: आंकड़ों की जुबानी
दिसंबर 2025 में इंडिगो का प्रदर्शन सवालों के घेरे में रहा है। उद्योग के आंकड़ों के अनुसार:
| श्रेणी | विवरण |
| कुल रद्द उड़ानें | 1,200+ (अनुमानित) |
| प्रभावित यात्री | 2.5 लाख से अधिक |
| औसत किराया वृद्धि | 150% – 300% (अंतिम समय पर) |
| शिकायतों की संख्या | नागरिक उड्डयन मंत्रालय को प्राप्त 15,000+ शिकायतें |
इंडिगो का पक्ष: “हम सहयोग के लिए तैयार हैं”
इस मामले पर इंडिगो के प्रवक्ता ने एक संक्षिप्त बयान जारी करते हुए कहा:
“हम भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के आदेश से अवगत हैं। इंडिगो हमेशा पारदर्शी और उपभोक्ता-केंद्रित नीतियों का पालन करती है। हम जांच में पूरी तरह सहयोग करेंगे और हमें विश्वास है कि हमने किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है।”
हालांकि, विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो इंडिगो पर भारी आर्थिक जुर्माना (Penalty) लगाया जा सकता है, जो उसके वार्षिक टर्नओवर का एक हिस्सा हो सकता है।
यात्रियों के अधिकार: अगर आपकी फ्लाइट कैंसिल हो तो क्या करें?
इस जांच के बीच, यह जानना जरूरी है कि डीजीसीए (DGCA) के नियमों के अनुसार यात्रियों के पास क्या अधिकार हैं:
- 24 घंटे से पहले सूचना: यदि उड़ान रद्द होने की सूचना 24 घंटे पहले दी जाती है, तो एयरलाइन को वैकल्पिक उड़ान या पूरा रिफंड देना होगा।
- अंतिम समय पर कैंसिलेशन: यदि आप हवाई अड्डे पर हैं और फ्लाइट कैंसिल होती है, तो एयरलाइन को भोजन, जलपान और होटल में ठहरने की व्यवस्था (यदि आवश्यक हो) मुफ्त में करनी होगी।
- मुआवजा: देरी की अवधि के आधार पर यात्री ₹5,000 से ₹10,000 तक के मुआवजे का दावा कर सकते हैं।
निष्कर्ष: भारतीय उड्डयन के लिए एक निर्णायक मोड़
इंडिगो के खिलाफ सीसीआई की यह जांच केवल एक कंपनी के बारे में नहीं है, बल्कि यह पूरे भारतीय विमानन उद्योग के लिए एक संदेश है। भारत एक ऐसा बाजार है जहां हवाई यात्रा अब विलासिता नहीं बल्कि जरूरत बन गई है। ऐसे में एयरलाइंस की जवाबदेही तय करना अनिवार्य है। यदि भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन पर आरोप साबित होते हैं, तो यह ग्राहकों के विश्वास के लिए एक बड़ा झटका होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. सीसीआई इंडिगो की जांच क्यों कर रहा है?
CCI दिसंबर में बड़े पैमाने पर फ्लाइट कैंसिलेशन और उपभोक्ताओं के साथ अनुचित व्यवहार (जैसे रिफंड न देना और अत्यधिक किराया वसूलना) के आरोपों की जांच कर रहा है।
Q2. क्या इंडिगो पर जुर्माना लग सकता है?
हाँ, यदि जांच में यह साबित होता है कि कंपनी ने प्रतिस्पर्धा नियमों का उल्लंघन किया है, तो करोड़ों रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।
Q3. क्या इस जांच से यात्रियों के टिकट सस्ते होंगे?
जांच का उद्देश्य निष्पक्ष बाजार सुनिश्चित करना है। यदि एयरलाइंस की मनमानी पर लगाम लगती है, तो भविष्य में किरायों में पारदर्शिता और स्थिरता आने की उम्मीद है।







