ग्रीनलैंड विवाद: इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी ने ट्रम्प की टैरिफ धमकी को बताया ‘बड़ी गलती’, क्या शुरू होगा नया व्यापार युद्ध?

जॉर्जिया मेलोनी

दुनिया इस समय एक बड़े कूटनीतिक और आर्थिक संकट की ओर बढ़ती दिख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) की ग्रीनलैंड को खरीदने की जिद और उसके विरोध में खड़े यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ (Tariffs) लगाने के फैसले ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बीच, ट्रम्प की करीबी सहयोगी मानी जाने वाली इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) ने भी अब इस कदम की आलोचना की है।

सियोल (दक्षिण कोरिया) की अपनी यात्रा के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए मेलोनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका द्वारा यूरोपीय देशों पर आर्थिक प्रतिबंध या नए टैरिफ लगाना एक “बड़ी गलती” (Mistake) है।

क्या है पूरा विवाद? (Trump Greenland Purchase Dispute)

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में घोषणा की है कि यदि यूरोपीय देश ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण या इसकी खरीद का समर्थन नहीं करते हैं, तो उन पर 10% से 25% तक का टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रम्प का तर्क है कि ग्रीनलैंड अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है और इसे रूस या चीन के प्रभाव से बचाने के लिए अमेरिका के पास होना चाहिए।

हालांकि, डेनमार्क और यूरोपीय संघ (EU) ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। इसके जवाब में ट्रम्प ने ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और स्कैंडिनेवियाई देशों से आने वाले सामानों पर भारी टैक्स लगाने की धमकी दी है।

मेलोनी का बयान: “संवाद की कमी और गलतफहमी”

जॉर्जिया मेलोनी ने इस पूरे विवाद को ‘कम्युनिकेशन गैप’ का नतीजा बताया है। उन्होंने कहा:

“मेरा मानना है कि आज के समय में नए प्रतिबंध लगाना एक गलती होगी। मैंने स्वयं राष्ट्रपति ट्रम्प से बात की है और अपना पक्ष रखा है। ग्रीनलैंड एक रणनीतिक क्षेत्र है और वहां यूरोपीय देशों की सैन्य उपस्थिति अमेरिका के खिलाफ नहीं, बल्कि बाहरी खतरों को रोकने के लिए है।”

मेलोनी ने इस बात पर जोर दिया कि NATO (नाटो) ही वह सही मंच है जहाँ आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा पर चर्चा होनी चाहिए, न कि व्यापार युद्ध के जरिए एक-दूसरे पर दबाव बनाना चाहिए।

यूरोप की प्रतिक्रिया: ब्लैकमेल या सुरक्षा?

यूरोपीय संघ के कई नेताओं ने ट्रम्प के इस कदम को “आर्थिक ब्लैकमेल” करार दिया है।

  • फ्रांस और जर्मनी: इन देशों ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी दबाव में नहीं झुकेंगे और अपनी सुरक्षा संप्रभुता को बनाए रखेंगे।
  • डेनमार्क: ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है, और कोपेनहेगन ने बार-बार कहा है कि “ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है।”
  • ब्रिटेन: पीएम कीर स्टार्मर ने भी इस व्यापार युद्ध को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए आत्मघाती बताया है।

आर्कटिक की सुरक्षा और नाटो (The Role of NATO)

ग्रीनलैंड केवल एक द्वीप नहीं है, बल्कि यह संसाधनों और रणनीतिक स्थान का खजाना है। जलवायु परिवर्तन के कारण जैसे-जैसे बर्फ पिघल रही है, नए समुद्री रास्ते खुल रहे हैं। रूस और चीन इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं। मेलोनी का मानना है कि यूरोपीय देशों द्वारा वहां अपनी सेना भेजना दरअसल पश्चिमी गठबंधन को मजबूत करना है, जिसे ट्रम्प प्रशासन गलत तरीके से देख रहा है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

अगर 1 फरवरी 2026 से ये टैरिफ लागू होते हैं, तो इसका असर केवल यूरोप पर ही नहीं, बल्कि भारत समेत पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर पड़ेगा।

  1. महंगाई: लग्जरी कारों, वाइन, और इंजीनियरिंग सामानों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
  2. शेयर बाजार: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता देखी जा रही है।
  3. कूटनीतिक दरार: अमेरिका और उसके सबसे पुराने सहयोगियों (NATO) के बीच अविश्वास की खाई चौड़ी हो सकती है।

निष्कर्ष

जॉर्जिया मेलोनी का यह बयान इस बात का संकेत है कि ट्रम्प के कट्टर समर्थक भी अब उनकी “ग्रीनलैंड नीति” से सहमत नहीं हैं। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या व्हाइट हाउस अपने फैसले पर पुनर्विचार करता है या दुनिया एक और बड़े व्यापार युद्ध की गवाह बनती है।