नई दिल्ली/इंफाल: पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में जारी जातीय तनाव और राजनीतिक अस्थिरता के बीच एक बड़ी सकारात्मक हलचल देखने को मिली है। मणिपुर के नए मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने अपने दो उप-मुख्यमंत्री, नेमचा किपजेन (भाजपा) और लोसी दिखो (NPF) के साथ नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।
मई 2023 में भड़की हिंसा के बाद यह पहला मौका है जब प्रधानमंत्री ने मणिपुर के मुख्यमंत्री और शीर्ष नेतृत्व को औपचारिक रूप से समय दिया है। इस बैठक को मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति की बहाली के लिए एक “टर्निंग पॉइंट” माना जा रहा है।
दिल्ली में ‘मिशन शांति’: क्या रही बैठक की खास बातें?
4 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद खेमचंद सिंह की यह पहली दिल्ली यात्रा है। प्रधानमंत्री के साथ हुई इस हाई-प्रोफाइल बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई:
- सुरक्षा और स्थिरता: मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी को राज्य में कानून-व्यवस्था सुधारने और विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास की खाई को पाटने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी।
- महिला सशक्तिकरण: सीएम ने पहाड़ियों (Hills) और घाटी (Valley) दोनों क्षेत्रों में महिलाओं के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए केंद्र से विशेष सहयोग मांगा।
- पीएम को आमंत्रण: मणिपुर के प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री मोदी को राज्य का दौरा करने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया है, ताकि जनता के बीच विश्वास बहाली का संदेश जाए।
विस्थापितों के लिए राहत: 5000 नए घरों को मिली मंजूरी
दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री खेमचंद ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी मुलाकात की। इस बैठक का एक बड़ा नतीजा यह निकला कि केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत मणिपुर के आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (IDPs) के लिए 5,000 नए घरों के निर्माण को मंजूरी दे दी है।
यह उन हजारों परिवारों के लिए एक बड़ी राहत है जो पिछले ढाई साल से राहत शिविरों में रह रहे हैं। सरकार का लक्ष्य इन परिवारों को सुरक्षा और सम्मान के साथ उनके मूल स्थानों पर फिर से बसाना है।
मणिपुर का नया राजनीतिक ढांचा: साझा शासन की कोशिश
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन (जो फरवरी 2025 में लगाया गया था) के खत्म होने के बाद अब एक ‘साझा शासन’ का मॉडल अपनाया गया है।
- युमनाम खेमचंद सिंह (Meitei): मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाल रहे हैं।
- नेमचा किपजेन (Kuki-Zo): मणिपुर की पहली महिला और कुकी समुदाय से आने वाली डिप्टी सीएम हैं।
- लोसी दिखो (Naga): नागा समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हुए दूसरे डिप्टी सीएम हैं।
इस बहु-जातीय नेतृत्व का उद्देश्य यह संदेश देना है कि नई सरकार राज्य के सभी 36 समुदायों को साथ लेकर चलने के लिए प्रतिबद्ध है।
जमीनी चुनौतियां और भविष्य की राह
भले ही दिल्ली में बैठकों का दौर जारी है, लेकिन मणिपुर में चुनौतियां अब भी बरकरार हैं।
- सुरक्षा स्थिति: हाल ही में उखरुल और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में छिटपुट तनाव की खबरें आई हैं।
- हथियारों की बरामदगी: सुरक्षा बलों द्वारा अभी भी तलाशी अभियान जारी हैं ताकि लूटे गए हथियारों को वापस हासिल किया जा सके।
- विश्वास की बहाली: घाटी और पहाड़ियों के बीच जो सामाजिक दरार आई है, उसे भरना नई सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र सरकार का सक्रिय हस्तक्षेप और मुख्यमंत्री का समावेशी दृष्टिकोण ही मणिपुर को पुराने गौरवशाली दिनों में वापस ले जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. मणिपुर के वर्तमान मुख्यमंत्री कौन हैं?
वर्तमान में युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने 4 फरवरी 2026 को कार्यभार संभाला।
2. पीएम मोदी और मणिपुर सीएम की बैठक में क्या फैसला हुआ?
बैठक में शांति बहाली, विस्थापितों के पुनर्वास और महिला सशक्तिकरण पर चर्चा हुई। इसके साथ ही 5,000 घरों के निर्माण को मंजूरी दी गई।
3. मणिपुर में राष्ट्रपति शासन कब लागू हुआ था?
मणिपुर में पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लगाया गया था, जो लगभग एक साल तक चला।
4. क्या मणिपुर में अब शांति है?
नई सरकार के गठन के बाद स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन संवेदनशील इलाकों में अभी भी सुरक्षा बल तैनात हैं और शांति प्रक्रिया जारी है।








