नई दिल्ली | 10 फरवरी 2026: भारत की संसद (लोकसभा) में आज उस वक्त भारी हंगामा हुआ जब यह खबर सामने आई कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने लोकसभा सचिवालय को एक आधिकारिक पत्र भेजकर PM CARES, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) और राष्ट्रीय रक्षा कोष (NDF) से जुड़े सवालों को ‘अस्वीकार्य’ (Inadmissible) घोषित करने को कहा है। सरकार के इस कदम ने एक बार फिर पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही की बहस को जन्म दे दिया है।
1. पीएमओ का तर्क: क्यों नहीं हो सकती संसद में चर्चा?
पीएमओ ने अपने पत्र में लोकसभा की कार्य संचालन नियमावली के ‘नियम 41’ का हवाला दिया है। सरकार का मुख्य तर्क यह है:
- स्वैच्छिक दान (Voluntary Contributions): ये फंड जनता के स्वैच्छिक दान से बने हैं और इनमें भारत की ‘संचित निधि’ (Consolidated Fund of India) से कोई पैसा नहीं दिया जाता।
- नियम 41(2)(viii): यह नियम कहता है कि सवाल ऐसे मामलों से संबंधित नहीं होने चाहिए जो मुख्य रूप से भारत सरकार के सरोकार के न हों।
- नियम 41(2)(xvii): इसके तहत उन निकायों या व्यक्तियों पर सवाल नहीं उठाए जा सकते जो सीधे तौर पर सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं हैं।
2. ‘पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट’ का कानूनी कवच
सरकार ने कोर्ट में भी पहले यही स्टैंड लिया है कि PM CARES कोई सरकारी निकाय (State) नहीं है, बल्कि एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट है।
- RTI से बाहर: चूंकि यह ‘पब्लिक अथॉरिटी’ नहीं है, इसलिए यह सूचना के अधिकार (RTI) के दायरे में नहीं आता।
- CAG ऑडिट नहीं: भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) इसका ऑडिट नहीं करते, बल्कि एक निजी ऑडिटर द्वारा इसका हिसाब देखा जाता है।
तुलनात्मक विश्लेषण: PM CARES बनाम अन्य सरकारी कोष
| विवरण | PM CARES फंड | राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) |
| गठन | मार्च 2020 (ट्रस्ट के रूप में) | आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 |
| फंड का स्रोत | केवल स्वैच्छिक दान (Corporate/Public) | बजटीय आवंटन और उपकर (Cess) |
| संसदीय सवाल | अब प्रतिबंधित (PMO निर्देश) | पूरी तरह स्वीकार्य |
| ऑडिट | निजी चार्टर्ड अकाउंटेंट | CAG द्वारा अनिवार्य ऑडिट |
| RTI के तहत | नहीं (केंद्र का स्टैंड) | हाँ (पब्लिक अथॉरिटी) |
3. विपक्षी दलों का प्रहार: “यह लोकतंत्र का अपमान है”
विपक्ष ने इस निर्देश को ‘संसदीय लोकतंत्र पर हमला’ करार दिया है। कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों का तर्क है कि:
- यदि फंड का प्रबंधन प्रधानमंत्री और वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री (रक्षा, गृह, वित्त) कर रहे हैं, तो यह निजी कैसे हो सकता है?
- सरकारी मशीनरी, सरकारी वेबसाइट्स और राष्ट्रीय प्रतीक (Emblem) का उपयोग करके धन जुटाना और फिर हिसाब न देना अनैतिक है।
- विपक्ष ने इसे ‘इलेक्टोरल बॉन्ड 2.0’ बताते हुए आरोप लगाया है कि यह बड़े कॉर्पोरेट्स और सरकार के बीच ‘क्विड प्रो क्वो’ (Quid Pro Quo) का जरिया बन सकता है।
4. रक्षा कोष पर भी सवालिया निशान
इस बार केवल PM CARES ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय रक्षा कोष (NDF) पर भी सवाल पूछने से मना कर दिया गया है। रक्षा कोष सेना के जवानों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए बनाया गया था। सांसदों का कहना है कि रक्षा जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्र के फंड पर चर्चा न होना राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।
निष्कर्ष: पारदर्शिता बनाम कार्यकारी गोपनीयता
लोकतंत्र में संसद का काम सरकार से सवाल पूछना और उसे जवाबदेह बनाना है। जब सरकार तकनीकी नियमों का हवाला देकर करोड़ों की राशि के हिसाब-किताब को चर्चा से बाहर रखती है, तो इससे जनता के विश्वास में कमी आती है। क्या यह समय इन ‘हाइब्रिड फंड्स’ के लिए एक नया पारदर्शी कानून बनाने का है? यह सवाल आज हर भारतीय के मन में है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. क्या PM CARES फंड में सरकारी पैसा होता है?
सरकार के अनुसार, इसमें कोई बजटीय राशि नहीं डाली जाती। हालांकि, कई सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) और सरकारी कर्मचारियों ने अपने वेतन से इसमें करोड़ों रुपये दान किए हैं।
Q2. लोकसभा का नियम 41 क्या है?
नियम 41 सांसदों द्वारा पूछे जाने वाले सवालों की पात्रता (Admissibility) तय करता है। इसमें 28 से अधिक शर्तें हैं जिनका पालन न करने पर सवाल रद्द किया जा सकता है।
Q3. क्या सुप्रीम कोर्ट ने PM CARES को क्लीन चिट दी है?
2020 में सुप्रीम कोर्ट ने इस फंड को NDRF में ट्रांसफर करने से मना कर दिया था, लेकिन इसकी पारदर्शिता और RTI के दायरे में आने को लेकर कानूनी लड़ाई अब भी जारी है।





