भूमिका:
पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वार कहा जाने वाला असम, आज आधुनिकता और कनेक्टिविटी की एक नई ऊंचाई को छू रहा है। 18 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के कालियाबोर में एक ऐतिहासिक प्रोजेक्ट— काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर—की आधारशिला रखी। यह केवल एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और प्रगति के बीच संतुलन बनाने की दिशा में भारत का सबसे बड़ा कदम है। इसके साथ ही, पीएम ने असम के लिए रेलवे बजट में की गई रिकॉर्ड वृद्धि की भी जानकारी दी, जिसने राज्य के विकास को ‘सुपरफास्ट’ ट्रैक पर ला दिया है।
1. काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर: क्या है यह प्रोजेक्ट? (The Concept)
काजीरंगा नेशनल पार्क, जो एक सींग वाले गैंडों के लिए विश्व प्रसिद्ध है, मानसून के दौरान और बढ़ते ट्रैफिक के कारण वन्यजीवों के लिए असुरक्षित हो जाता था। नेशनल हाईवे-37 (NH-37) पर होने वाली पशुओं की मौतों को रोकने के लिए यह एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जा रहा है।
- लागत: लगभग ₹6,950 करोड़।
- लंबाई: यह लगभग 35 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर होगा।
- उद्देश्य: जानवरों को कॉरिडोर के नीचे से स्वतंत्र रूप से गुजरने का रास्ता देना, जबकि ऊपर से बिना किसी बाधा के गाड़ियां चल सकेंगी।
2. असम रेलवे का कायाकल्प: ₹2,000 करोड़ से ₹10,000 करोड़ तक का सफर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में आंकड़ों के जरिए बताया कि कैसे केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर को प्राथमिकता दी है।
- बजट में उछाल: 2014 से पहले असम के लिए रेलवे का औसत बजट करीब ₹2,000 करोड़ हुआ करता था, जिसे अब बढ़ाकर ₹10,000 करोड़ सालाना कर दिया गया है।
- डबलिंग और इलेक्ट्रिफिकेशन: राज्य की अधिकांश रेलवे लाइनों का दोहरीकरण (Double Tracking) और 100% विद्युतीकरण (Electrification) का काम अंतिम चरण में है।
- वंदे भारत का विस्तार: असम अब ‘वंदे भारत’ जैसी आधुनिक ट्रेनों के नेटवर्क से पूरी तरह जुड़ चुका है, जिससे व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिला है।
3. वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन पर प्रभाव (Impact on Conservation)
काजीरंगा में एलिवेटेड कॉरिडोर बनने से न केवल इंसानों की यात्रा सुखद होगी, बल्कि असम के गौरव ‘एक सींग वाले गैंडे’ और हाथियों को भी नया जीवन मिलेगा।
- जीरो एक्सीडेंट जोन: कॉरिडोर बनने के बाद एनएच-37 पर पशुओं की टक्कर से होने वाली मौतें शून्य हो जाएंगी।
- ईको-टूरिज्म: यह कॉरिडोर अपने आप में इंजीनियरिंग का एक चमत्कार होगा, जो दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करेगा।
- निर्बाध लॉजिस्टिक्स: गुवाहाटी से ऊपरी असम की कनेक्टिविटी तेज होगी, जिससे माल ढुलाई का समय 30-40% कम हो जाएगा।
4. प्रधानमंत्री का ‘अष्टलक्ष्मी’ विजन
पीएम मोदी ने दोहराया कि उनके लिए पूर्वोत्तर भारत की ‘अष्टलक्ष्मी’ (आठ राज्य) है।
- शांति और समृद्धि: बोडो शांति समझौते के बाद क्षेत्र में आई स्थिरता ने निवेश के नए रास्ते खोले हैं।
- गुवाहाटी: दक्षिण-पूर्व एशिया का हब: ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के तहत गुवाहाटी को दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ जोड़ने के लिए बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है।
5. असम की जनता को क्या मिलेगा फायदा?
- रोजगार: अकेले काजीरंगा प्रोजेक्ट और रेलवे विस्तार से स्थानीय स्तर पर 50,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है।
- रियल एस्टेट और बिजनेस: बेहतर सड़कों और रेलवे के कारण राजमार्ग के किनारे के कस्बों में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
- शिक्षा और स्वास्थ्य: तेज कनेक्टिविटी का मतलब है कि अब ग्रामीण इलाकों से लोग कम समय में गुवाहाटी या डिब्रूगढ़ के मेडिकल और शिक्षण संस्थानों तक पहुंच सकेंगे।
निष्कर्ष (Conclusion)
असम में काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर और रेलवे बजट में यह भारी निवेश इस बात का प्रमाण है कि दिल्ली अब दिसपुर से दूर नहीं है। ₹10,000 करोड़ का रेलवे फंड और ₹7,000 करोड़ का यह कॉरिडोर असम की तस्वीर और तकदीर बदलने वाले हैं। यह प्रोजेक्ट न केवल असम को उत्तर-पूर्व के पावरहाउस के रूप में स्थापित करेगा, बल्कि दुनिया को ‘टिकाऊ विकास’ (Sustainable Development) का एक बेहतरीन उदाहरण भी देगा।







