कौशल विकास या केवल ‘कागजी’ विकास? PMKVY 4.0 के क्लासरूम पड़े हैं वीरान; 27 लाख की ट्रेनिंग पर उठे सवाल

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना

नई दिल्ली | 10 फरवरी 2026: भारत के कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की फ्लैगशिप योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 (PMKVY 4.0), इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत 27.08 लाख से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। देश के विभिन्न हिस्सों से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, प्रशिक्षण केंद्र (Training Centers) खाली पड़े हैं और जिन युवाओं को “प्रशिक्षित” बताया जा रहा है, उनमें से अधिकांश को रोजगार का कोई सुराग नहीं है।

1. 27 लाख का आंकड़ा और खाली क्लासरूम का रहस्य

इसरो के रोडमैप और बड़ी ट्रेड डील्स के बीच, भारत की आंतरिक स्किलिंग पॉलिसी में एक बड़ा गैप (Gap) नजर आ रहा है।

  • डेटा बनाम हकीकत: आधिकारिक डेटा कहता है कि दिसंबर 2025 तक 27 लाख युवाओं ने ट्रेनिंग ली। लेकिन स्वतंत्र मीडिया रिपोर्टों और हालिया ऑडिट सुझावों के अनुसार, कई राज्यों में ट्रेनिंग सेंटर केवल ‘कागजों’ पर चल रहे हैं।
  • वीराने केंद्र: ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बने ‘स्किल हब’ में बुनियादी ढांचे की कमी है। छात्र वहां नहीं पहुँच रहे हैं, फिर भी उनकी उपस्थिति दर्ज की जा रही है।

2. CAG की रिपोर्ट ने खोली पोल: क्या यह एक बड़ा घोटाला है?

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट ने योजना की विफलता के कुछ चौंकाने वाले कारण गिनाए हैं:

  • फर्जी डेटा (Ghost Beneficiaries): ऑडिट में पाया गया कि हजारों उम्मीदवारों के लिए एक ही बैंक खाता नंबर का इस्तेमाल किया गया। केरल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में “फोटोशॉप्ड” (Photoshopped) ऑफर लेटर और सर्टिफिकेट जारी किए जाने के गंभीर आरोप लगे हैं।
  • कम प्लेसमेंट रेट: प्रशिक्षण पाने वाले युवाओं में से केवल 41% को ही रोजगार मिल पाया है। यह आंकड़ा बताता है कि दी जा रही ट्रेनिंग बाजार की मांग (Market Demand) के अनुरूप नहीं है।
  • डेटा इंटिग्रिटी: स्किल इंडिया डिजिटल हब (SIDH) पर मौजूद लगभग 95% डेटा में ईमेल या मोबाइल नंबर गलत पाए गए हैं, जिससे ट्रेनिंग की प्रामाणिकता संदिग्ध हो जाती है।

PMKVY 4.0: लक्ष्य बनाम वास्तविकता (2025-26)

विवरणसरकारी दावाग्राउंड रिपोर्ट/ऑडिट निष्कर्ष
प्रशिक्षित उम्मीदवार27.08 लाखबड़ी संख्या में ‘घोस्ट बेनेफिशियरी’ की आशंका
प्लेसमेंट दरसंतोषजनकमात्र 41% (CAG के अनुसार)
ट्रेनिंग सेंटर15,500+ सक्रियकई केंद्र बंद या वीरान पाए गए
फंड का उपयोग₹1,652 करोड़ (2024-25)फंड के दुरुपयोग और फर्जी बिलिंग के आरोप

3. ‘डाटा एंट्री’ का जाल और कौशल की कमी

योजना की एक बड़ी आलोचना यह है कि यह युवाओं को आधुनिक तकनीक (जैसे AI, रिन्यूएबल एनर्जी) के बजाय पुराने और कम-मूल्य वाले कोर्स में फंसा रही है।

  • लो-वैल्यू कोर्स: लगभग 40% ट्रेनिंग आज भी टेलरिंग (Tailoring) और डोमेस्टिक डेटा एंट्री (Data Entry) जैसे क्षेत्रों में दी जा रही है, जहाँ बाजार पहले से ही संतृप्त है।
  • गुणवत्ता का अभाव: जिन केंद्रों को भविष्य के कौशल (Future Skills) सिखाने थे, वहां न तो योग्य ट्रेनर हैं और न ही आवश्यक सॉफ्टवेयर।

4. विपक्ष का हमला: “कौशल भारत या फर्जीवाड़ा भारत?”

संसद के चल रहे बजट सत्र में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे “डेमोग्राफिक डिजास्टर” बताते हुए मांग की है कि:

  1. पूरे 14,450 करोड़ रुपये के बजट का ‘फॉरेन्सिक ऑडिट’ कराया जाए।
  2. ट्रेनिंग पार्टनर्स (Training Partners) की जवाबदेही तय हो और उन पर ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई की जाए।
  3. प्लेसमेंट के आंकड़ों को सार्वजनिक रूप से ‘वेरिफाई’ किया जाए।

5. सुधार की राह: क्या हो सकता है अगला कदम?

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आंकड़े गिनने से भारत ‘स्किल कैपिटल’ नहीं बनेगा। इसके लिए कुछ कड़े कदम उठाने होंगे:

  • क्वालिटी ऑडिट: हर ट्रेनिंग सेंटर का औचक निरीक्षण और बायोमेट्रिक उपस्थिति का सख्त पालन।
  • इंडस्ट्री लिंकेज: ट्रेनिंग को सीधे बड़ी कंपनियों (जैसे रिलायंस, टाटा, आईबीएम) के साथ जोड़ना ताकि सर्टिफिकेट मिलते ही जॉब सुनिश्चित हो।
  • आउटकम आधारित भुगतान: सरकार को ट्रेनिंग पार्टनर्स को भुगतान तभी करना चाहिए जब छात्र को वास्तव में नौकरी मिल जाए।

निष्कर्ष: आंकड़ों की चमक में युवाओं का भविष्य धुंधला

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 का विचार सराहनीय है, लेकिन इसका क्रियान्वयन (Implementation) भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ रहा है। यदि समय रहते “क्वालिटी ऑडिट” और सुधार नहीं किए गए, तो भारत का विशाल ‘युवा लाभांश’ (Demographic Dividend) एक बोझ में बदल सकता है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. PMKVY 4.0 में ट्रेनिंग के बाद नौकरी क्यों नहीं मिल रही?

इसका मुख्य कारण ट्रेनिंग और मार्केट डिमांड के बीच का अंतर (Skill Gap) है। कई कोर्स उद्योगों की वर्तमान जरूरत के हिसाब से पुराने हो चुके हैं।

Q2. क्या कोई भी व्यक्ति कौशल विकास योजना में भाग ले सकता है?

हाँ, 15-45 वर्ष का कोई भी भारतीय नागरिक, जिसके पास आधार कार्ड है और जो संबंधित कोर्स की पात्रता पूरी करता है, इसमें आवेदन कर सकता है।

Q3. सरकार फर्जी ट्रेनिंग सेंटरों पर क्या कार्रवाई कर रही है?

रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक 1,189 केंद्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई है और 415 आईटीआई (ITIs) की मान्यता रद्द की गई है।