भारतीय रुपये पर महा-संकट: ₹91.73 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर गिरा रुपया, आखिर क्यों नहीं आया RBI बचाने?

Rupee at Record Low

नई दिल्ली/मुंबई | बुधवार, 21 जनवरी 2026: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आज का दिन ‘ब्लैक वेडनेसडे’ साबित हुआ। वैश्विक बाजारों में मची उथल-पुथल और घरेलू स्तर पर विदेशी फंडों की निकासी के बीच भारतीय रुपया (Indian Rupee) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹91.73 (अनंतिम) के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।

केवल एक दिन में रुपये में 76 पैसे की भारी गिरावट दर्ज की गई। लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि आम तौर पर रुपये को बचाने वाला ‘संकटमोचक’ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आज बाजार से गायब दिखा, जिससे गिरावट और भी भयावह हो गई।

क्यों टूटा रुपया? गिरावट के 5 बड़े कारण

रुपये की इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे एक नहीं, बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह “परफेक्ट स्टॉर्म” (Perfect Storm) की स्थिति है।

1. ट्रंप का ग्रीनलैंड दांव और अमेरिका-यूरोप ट्रेड वॉर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड (Greenland) पर नियंत्रण और यूरोपीय देशों पर 200% तक के टैरिफ लगाने की धमकी ने वैश्विक निवेशकों को डरा दिया है। इस तनाव के कारण निवेशकों ने जोखिम वाली संपत्तियों (जैसे भारतीय बाजार) से पैसा निकालकर सोने और डॉलर जैसे ‘सुरक्षित ठिकानों’ (Safe Havens) में लगाना शुरू कर दिया है।

2. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भारी निकासी

जनवरी 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग ₹32,253 करोड़ ($3.96 बिलियन) निकाल लिए हैं। जब FPI भारत से अपना पैसा निकालते हैं, तो वे रुपये बेचकर डॉलर खरीदते हैं, जिससे रुपये की वैल्यू कम हो जाती है।

3. RBI की ‘रहस्यमयी’ चुप्पी

बाजार के जानकारों का कहना है कि आज रुपये में गिरावट के दौरान RBI की उपस्थिति बेहद कम थी। आमतौर पर जब रुपया तेजी से गिरता है, तो RBI डॉलर बेचकर बाजार को स्थिरता प्रदान करता है। लेकिन आज “लिक्विडिटी सपोर्ट” की कमी ने सट्टेबाजों को मौका दिया, जिससे रुपया ₹91.73 तक फिसल गया।

4. वैश्विक बॉन्ड यील्ड में उछाल

अमेरिका और जापान में सरकारी बॉन्ड की ब्याज दरें (Bond Yields) रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। इससे वैश्विक फंड्स अब भारत जैसे उभरते बाजारों के बजाय विकसित देशों के बॉन्ड में निवेश करना ज्यादा फायदेमंद मान रहे हैं।

5. कच्चे तेल और मेटल इम्पोर्ट की मांग

भारत में मेटल इम्पोर्टर्स (धातु आयातकों) की ओर से डॉलर की जबरदस्त मांग देखी गई है। साथ ही, कच्चे तेल की कीमतें $64 प्रति बैरल के आसपास स्थिर होने के बावजूद, भारत का आयात बिल रुपये पर दबाव बनाए हुए है।

क्या और गिरेगा रुपया? ₹92 का स्तर दूर नहीं?

करेंसी मार्केट के विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि वैश्विक तनाव कम नहीं होता है, तो रुपया जल्द ही ₹92.00 के स्तर को छू सकता है।

विशेषज्ञ की राय: “जब तक अमेरिका-यूरोप के बीच ग्रीनलैंड विवाद और ट्रेड डील पर स्थिति साफ नहीं होती, रुपया दबाव में रहेगा। RBI के पास $687 बिलियन का पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) है, लेकिन वे शायद लंबी रेस के लिए डॉलर बचा रहे हैं।” – अनिल कुमार भंसाली, ट्रेजरी विशेषज्ञ।

आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर?

रुपये के कमजोर होने का सीधा मतलब है ‘महंगाई का झटका’।

  1. इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल: भारत ज्यादातर चिप्स और कंपोनेंट्स आयात करता है। डॉलर महंगा होने से लैपटॉप, मोबाइल और अन्य गैजेट्स की कीमतें बढ़ेंगी।
  2. विदेश यात्रा और पढ़ाई: अगर आप विदेश घूमने या पढ़ने की योजना बना रहे हैं, तो आपको कॉलेज की फीस और होटल बुकिंग के लिए अब कहीं ज्यादा रुपये खर्च करने होंगे।
  3. पेट्रोल-डीजल: चूंकि तेल का भुगतान डॉलर में होता है, इसलिए रुपये की कमजोरी अंततः तेल कंपनियों पर बोझ डालेगी, जो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का कारण बन सकता है।

निष्कर्ष: क्या है समाधान?

रुपये को थामने के लिए भारत को न केवल RBI के हस्तक्षेप की जरूरत है, बल्कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (US-India Trade Deal) के जल्द पूरा होने की भी उम्मीद है। यदि यह डील फाइनल हो जाती है, तो निवेशकों का भरोसा लौटेगा और रुपये में रिकवरी देखी जा सकती है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. रुपया आज रिकॉर्ड निचले स्तर पर क्यों गिरा?

रुपया मुख्य रूप से विदेशी निवेशकों (FPI) की निकासी, अमेरिका-यूरोप के बीच बढ़ते व्यापार तनाव और RBI के बाजार में सक्रिय न होने के कारण गिरा।

Q2. आज डॉलर के मुकाबले रुपये की वैल्यू क्या है?

21 जनवरी 2026 को रुपया रिकॉर्ड ₹91.73 के स्तर पर बंद हुआ।

Q3. क्या RBI रुपये को गिरने से रोक सकता है?

हाँ, RBI अपने विशाल विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचकर रुपये की गिरावट को धीमा कर सकता है, लेकिन वह इसे पूरी तरह से नहीं रोक सकता यदि वैश्विक कारक बहुत मजबूत हों।