मुंबई/नई दिल्ली | शनिवार, 24 जनवरी 2026: भारतीय शेयर बाजार में इस हफ्ते जो मंजर दिखा, उसे निवेशक शायद ही कभी भूल पाएं। बाजार में आई इस ‘सुनामी’ ने दलाल स्ट्रीट पर कोहराम मचा दिया है। सेंसेक्स और निफ्टी अपने उच्चतम स्तरों से 5% तक नीचे फिसल चुके हैं, जिससे महज एक हफ्ते के भीतर बीएसई (BSE) में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹16 लाख करोड़ से अधिक कम हो गया है।
सबसे बुरा असर अडाणी ग्रुप (Adani Group) के शेयरों पर दिखा, जहां अमेरिकी विनियामक संस्था SEC की नई कार्रवाई की खबरों ने आग में घी डालने का काम किया।
बाजार की ‘तबाही’ के आंकड़े: एक नजर में
| इंडेक्स | साप्ताहिक गिरावट | वर्तमान स्तर (23 जनवरी) |
| BSE Sensex | ~2,032 अंक (2.43%) | 81,537.70 |
| NSE Nifty | ~645 अंक (2.51%) | 25,048.65 |
| मार्केट कैप नुकसान | ₹16,28,561 करोड़ | – |
क्यों क्रैश हुआ शेयर बाजार? 5 मुख्य कारण
बाजार के जानकारों का मानना है कि यह गिरावट किसी एक कारण से नहीं, बल्कि कई प्रतिकूल परिस्थितियों के एक साथ आने का परिणाम है:
1. अडाणी ग्रुप पर SEC का शिकंजा
शुक्रवार को बाजार के गिरने की सबसे बड़ी वजह अडाणी ग्रुप के शेयरों में मची भगदड़ थी। अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) ने गौतम अडाणी और सागर अडाणी को ईमेल के जरिए समन भेजने के लिए अमेरिकी अदालत से अनुमति मांगी है। यह मामला कथित तौर पर $265 मिलियन की रिश्वतखोरी से जुड़ा है। इस खबर के आते ही अडाणी एंटरप्राइजेज और अडाणी पोर्ट्स जैसे शेयरों में 10% से 15% तक का लोअर सर्किट देखा गया।
2. रुपये में ऐतिहासिक गिरावट
भारतीय रुपया पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92 के स्तर को पार कर गया। हालांकि यह थोड़ा संभलकर 91.88 पर बंद हुआ, लेकिन रुपये की कमजोरी ने विदेशी निवेशकों (FIIs) के बीच घबराहट पैदा कर दी है।

3. ट्रंप के टैरिफ की धमकी और ट्रेड वॉर
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय संघ (EU) और भारत पर लगाए गए नए टैरिफ (Tariffs) के डर ने वैश्विक व्यापार युद्ध की संभावना को बढ़ा दिया है। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इस महीने अब तक ₹34,000 करोड़ से अधिक के शेयर बेचे हैं।
4. कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजे
दिसंबर तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे कई दिग्गज कंपनियों के लिए उम्मीद से कम रहे हैं। अडाणी ग्रीन के मुनाफे में 99% की भारी गिरावट और एचडीएफसी बैंक जैसे दिग्गजों पर दबाव ने बाजार के सेंटीमेंट को कमजोर किया है।
5. मिडकैप और स्मॉलकैप में बड़ी बिकवाली
सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप इंडेक्स में 4.4% और स्मॉलकैप में 5.5% की गिरावट आई है। यह दर्शाता है कि बाजार में चौतरफा बिकवाली (Broad-based selling) का माहौल है।
अडाणी ग्रुप के कौन से शेयर सबसे ज्यादा टूटे?
अडाणी ग्रुप के सभी 12 लिस्टेड शेयरों में लाल निशान पर कारोबार हुआ। शुक्रवार को अकेले इस ग्रुप का मार्केट कैप ₹1.4 लाख करोड़ कम हो गया।
- अडाणी ग्रीन एनर्जी: 14% की गिरावट।
- अडाणी एंटरप्राइजेज: 11% की गिरावट।
- अडाणी पोर्ट्स: 7.5% की गिरावट।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में ‘Catching a falling knife’ (गिरते हुए चाकू को पकड़ना) से बचना चाहिए।
- गिरावट का इंतजार करें: जब तक बाजार 25,000 के निफ्टी स्तर पर स्थिर नहीं होता, तब तक बड़ी खरीदारी से बचें।
- क्वालिटी स्टॉक्स पर ध्यान: केवल उन्हीं कंपनियों में निवेश करें जिनकी अर्निंग ग्रोथ (Earnings Growth) मजबूत है।
- SIP जारी रखें: लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट पोर्टफोलियो को औसत (Average) करने का एक अवसर हो सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. शेयर बाजार में आई इस गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारणों में अडाणी ग्रुप पर अमेरिकी SEC की जांच, ट्रंप के टैरिफ की धमकी और रुपये का कमजोर होना शामिल है।
Q2. अडाणी ग्रुप के शेयरों में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
SEC द्वारा गौतम अडाणी को ईमेल के जरिए समन भेजने की खबर और रिश्वतखोरी के आरोपों ने निवेशकों का भरोसा हिला दिया है।
Q3. क्या अब बाजार में निवेश करने का सही समय है?
बाजार अभी अस्थिर है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे बजट 2026 और वैश्विक संकेतों के स्पष्ट होने का इंतजार करें।







