नई दिल्ली: केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच चल रही कानूनी जंग में सुप्रीम कोर्ट ने एक कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार को झटका देते हुए राज्य पुलिस द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों पर दर्ज की गई एफआईआर (FIR) के अमल पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय जांच में राज्यों का हस्तक्षेप एक “गंभीर चिंता का विषय” है।
“अगर हस्तक्षेप नहीं रुका, तो अराजकता फैलेगी”
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि राज्य सरकारें केंद्रीय एजेंसियों की जांच में बाधा डालेंगी, तो देश में कानून-व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा। अदालत ने जोर देकर कहा कि ‘रूल ऑफ लॉ’ के लिए जांच का निष्पक्ष होना जरूरी है। इसके साथ ही, कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को आदेश दिया कि 8 जनवरी को आई-पैक (I-PAC) कार्यालय में हुई छापेमारी के सभी सीसीटीवी फुटेज को साक्ष्य के तौर पर सुरक्षित रखा जाए।
विवाद की जड़: I-PAC दफ्तर में हुई छापेमारी
पूरा मामला 8 जनवरी 2026 का है, जब कोयला घोटाले की जांच के सिलसिले में ईडी की टीम कोलकाता स्थित राजनीतिक सलाहकार फर्म I-PAC के दफ्तर पहुंची थी।
ईडी की ओर से लगाए गए गंभीर आरोप:
- साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़: ईडी का दावा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं छापेमारी वाली जगह पहुंचीं और वहां से जरूरी डिजिटल सबूत और कागजात उठा ले गईं।
- अधिकारियों को धमकाना: एजेंसी ने आरोप लगाया कि राज्य के बड़े पुलिस अधिकारियों ने जांच दल को उनके काम से रोका।
- जवाबी एफआईआर: छापेमारी के तुरंत बाद, बंगाल पुलिस ने ईडी के अधिकारियों पर ही मामले दर्ज कर दिए थे, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने रोक दिया है।
ममता बनर्जी और टीएमसी का स्टैंड
दूसरी तरफ, ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनकी पैरवी कर रहे वकीलों ने कोर्ट में कहा कि आई-पैक के पास पार्टी की गोपनीय चुनावी रणनीतियां थीं, जिन्हें ईडी ‘जब्त’ करने की कोशिश कर रही थी। राज्य सरकार का तर्क है कि यह छापेमारी राजनीति से प्रेरित है और एजेंसी अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर रही है।
कोर्ट का अगला कदम
सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल सरकार से दो हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को तय की गई है। तब तक के लिए ईडी अधिकारियों को बंगाल पुलिस की कार्रवाई से राहत मिल गई है।







