साल 2026 की शुरुआत दुनिया के लिए एक बड़ी कूटनीतिक उथल-पुथल लेकर आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने एक बार फिर ग्रीनलैंड (Greenland) को लेकर अपना पुराना दांव चला है, लेकिन इस बार मामला केवल बातचीत तक सीमित नहीं है। ट्रम्प ने अब उन यूरोपीय देशों पर 100% टैरिफ (Tariffs) लगाने की धमकी दी है जो ग्रीनलैंड पर अमेरिका के दावे का विरोध कर रहे हैं।
इस कदम ने न केवल यूरोप बल्कि पूरी दुनिया के बाजारों में हलचल मचा दी है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह पूरा विवाद क्या है और इसका भारत सहित वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर हो सकता है।
विवाद की जड़: ग्रीनलैंड और ट्रम्प की जिद
ग्रीनलैंड, जो तकनीकी रूप से डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत्त (Semi-autonomous) हिस्सा है, लंबे समय से ट्रम्प की नजरों में रहा है। ट्रम्प का मानना है कि इस द्वीप की रणनीतिक स्थिति और वहां मौजूद प्राकृतिक संसाधन (जैसे दुर्लभ खनिज और तेल) अमेरिका की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य हैं।
जनवरी 2026 में, ट्रम्प ने घोषणा की कि जो देश डेनमार्क का समर्थन करेंगे और अमेरिका के ‘ग्रीनलैंड मिशन’ में बाधा डालेंगे, उन्हें भारी आर्थिक कीमत चुकानी होगी। उन्होंने 10% से शुरू होकर 100% तक के टैरिफ की चेतावनी दी है।
कीर स्टार्मर और यूरोपीय संघ (EU) का रुख
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने ‘शांति और संयम’ (Calm and Restraint) की अपील करते हुए कहा है कि सहयोगियों के बीच व्यापार युद्ध किसी के हित में नहीं है। हालांकि, ब्रिटेन इस समय एक नाजुक स्थिति में है, क्योंकि उसे अमेरिका के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को भी बचाना है।
दूसरी ओर, यूरोपीय संघ (European Union) ने कड़ा रुख अपनाया है। यूरोपीय नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी संप्रभुता (Sovereignty) से समझौता नहीं करेंगे। ईयू ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका टैरिफ लागू करता है, तो वे भी ‘जवाबी कार्रवाई’ (Retaliatory measures) करेंगे।
किन देशों पर गिर सकती है गाज?
ट्रम्प की हिट लिस्ट में मुख्य रूप से वे 8 देश शामिल हैं जो डेनमार्क के साथ खड़े हैं:
- डेनमार्क (Denmark)
- फ्रांस (France)
- जर्मनी (Germany)
- यूनाइटेड किंगडम (UK)
- नॉर्वे (Norway)
- स्वीडन (Sweden)
- फिनलैंड (Finland)
- नीदरलैंड (Netherlands)
क्या यह केवल राजनीति है या कुछ और?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प की यह टैरिफ रणनीति केवल ग्रीनलैंड को खरीदना नहीं है, बल्कि यह “अमेरिका फर्स्ट” (America First) नीति का हिस्सा है। इसके जरिए वे यूरोप पर दबाव बनाना चाहते हैं ताकि व्यापार समझौतों में अमेरिका को ज्यादा फायदा मिल सके।
ट्रम्प के मुख्य तर्क:
- राष्ट्रीय सुरक्षा: आर्कटिक क्षेत्र में चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए ग्रीनलैंड पर नियंत्रण जरूरी है।
- गोल्डन डोम शील्ड: ट्रम्प का दावा है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की मिसाइल डिफेंस प्रणाली (Golden Dome) के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
अगर अमेरिका 100% टैरिफ लागू करता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह से ध्वस्त हो सकती है।
- महंगाई: यूरोप से आने वाली दवाएं, कारें और लग्जरी सामान महंगे हो जाएंगे।
- शेयर बाजार: अनिश्चितता के कारण ग्लोबल स्टॉक मार्केट्स में भारी गिरावट देखी जा सकती है।
- भारत पर असर: हालांकि भारत इस सीधे विवाद का हिस्सा नहीं है, लेकिन वैश्विक व्यापार युद्ध की स्थिति में डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता भारत के आयात-निर्यात को प्रभावित कर सकती है।
निष्कर्ष: क्या युद्ध टल पाएगा?
फिलहाल कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है। दावोस में हो रही बैठकों में इस मुद्दे पर चर्चा गर्म है। क्या डेनमार्क दबाव में आकर झुक जाएगा? या यूरोप और अमेरिका के बीच एक नया ‘शीत युद्ध’ शुरू होगा? यह आने वाले कुछ हफ्ते तय करेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. क्या ग्रीनलैंड बिकाऊ है?
नहीं, डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकार ने बार-बार कहा है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और यह उनके लोगों की इच्छा पर निर्भर करता है।
2. 100% टैरिफ का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि अगर यूरोप से कोई वस्तु $100 की अमेरिका आती है, तो सरकार उस पर $100 का टैक्स लगाएगी, जिससे उसकी कीमत $200 हो जाएगी।
3. कीर स्टार्मर इस विवाद में क्या भूमिका निभा रहे हैं?
स्टार्मर एक मध्यस्थ (Mediator) के रूप में काम करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि अमेरिका और ईयू के बीच ट्रेड वॉर को रोका जा सके।







