अमेरिका का ‘टैरिफ शॉक’ 2026: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप का नया दांव; दुनिया भर से आयात पर लगेगा 15% टैक्स

US Global Import Tariff 2026

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: वैश्विक व्यापार जगत में एक बार फिर ‘टैरिफ युद्ध’ (Tariff War) छिड़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी आर्थिक नीतियों को बरकरार रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए लगभग सभी देशों से होने वाले आयात पर 10% से 15% तक का वैश्विक आयात शुल्क (Universal Import Surcharge) लगा दिया है। यह फैसला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले के ठीक बाद आया है, जिसमें कोर्ट ने ट्रंप के पुराने टैरिफ आदेशों को “असंवैधानिक” करार दिया था।

सुप्रीम कोर्ट का झटका और ट्रंप का ‘प्लान B’

20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक 6-3 के बहुमत वाले फैसले में व्यवस्था दी कि राष्ट्रपति के पास IEEPA (इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट) के तहत बिना कांग्रेस की मंजूरी के व्यापक टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं है। इस फैसले ने ट्रंप प्रशासन द्वारा पहले से वसूले जा रहे अरबों डॉलर के टैक्स को अवैध बना दिया।

हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने हार मानने के बजाय Section 122 (Trade Act of 1974) का इस्तेमाल करते हुए नया ‘इम्पोर्ट सरचार्ज’ लागू कर दिया।

  • 10% से शुरुआत: 24 फरवरी 2026 से 10% शुल्क आधिकारिक रूप से शुरू हो गया।
  • 15% का लक्ष्य: ट्रंप ने घोषणा की है कि वे इसे जल्द ही बढ़ाकर 15% करेंगे।
  • समय सीमा: यह शुल्क फिलहाल 150 दिनों के लिए प्रभावी है, जिसे आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस की मंजूरी की आवश्यकता होगी।

स्टील, बैटरी और केमिकल्स पर ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का खतरा

ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, केवल वैश्विक टैरिफ ही काफी नहीं है। ट्रंप प्रशासन अब Section 232 के तहत स्टील (Steel), बड़ी बैटरियों (Batteries) और औद्योगिक रसायनों (Chemicals) पर अतिरिक्त ‘राष्ट्रीय सुरक्षा टैरिफ’ लगाने पर विचार कर रहा है।

  • निशाने पर कौन? इसमें मुख्य रूप से चीन, यूरोपीय संघ और भारत जैसे देश शामिल हो सकते हैं जो अमेरिका को इन कच्चे मालों की आपूर्ति करते हैं।
  • मकसद: अमेरिका का तर्क है कि इन महत्वपूर्ण उत्पादों के लिए अन्य देशों पर निर्भरता उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत के लिए यह खबर मिली-जुली प्रतिक्रिया लेकर आई है:

  1. राहत की बात: पहले भारत को लगभग 18-25% तक के टैरिफ का सामना करना पड़ रहा था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब भारत पर 10% (या संभावित 15%) का फ्लैट रेट लगेगा, जो पुराने रेट से कम है।
  2. चुनौती: स्टील और केमिकल्स जैसे क्षेत्रों पर यदि अतिरिक्त ड्यूटी लगती है, तो भारत के निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा।
  3. रुपये की स्थिति: डॉलर के मजबूत होने और टैरिफ की अनिश्चितता के कारण भारतीय रुपया अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव महसूस कर रहा है।

टैरिफ का गणित: किसे मिलेगी छूट?

हालांकि यह एक ‘वैश्विक’ शुल्क है, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों को इसमें शामिल नहीं किया है (Carve-outs):

  • महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals): ग्रीन एनर्जी के लिए जरूरी।
  • फार्मास्यूटिकल्स: दवाओं की कीमतों को काबू में रखने के लिए।
  • कनाडा और मेक्सिको (USMCA): उत्तर अमेरिकी व्यापार समझौते के तहत इन देशों को फिलहाल राहत दी गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. ट्रंप ने नया टैरिफ क्यों लगाया?

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पुराने ‘Reciprocal Tariffs’ को अवैध घोषित कर दिया था। अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को जारी रखने के लिए उन्होंने नए कानूनी प्रावधान (Section 122) का सहारा लिया है।

2. क्या 15% टैरिफ सभी देशों पर लागू है?

हाँ, यह एक ‘यूनिवर्सल’ टैरिफ है, लेकिन मेक्सिको, कनाडा और कुछ विशिष्ट उत्पादों जैसे दवाओं और महत्वपूर्ण खनिजों को इसमें छूट दी गई है।

3. क्या भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर इसका असर पड़ेगा?

भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में एक अंतरिम व्यापार समझौता हुआ था। भारतीय अधिकारी फिलहाल यह अध्ययन कर रहे हैं कि नए वैश्विक टैरिफ उस समझौते की शर्तों को कैसे प्रभावित करेंगे।

4. Section 122 क्या है?

यह अमेरिकी व्यापार कानून का एक हिस्सा है जो राष्ट्रपति को 150 दिनों के लिए अधिकतम 15% तक का अस्थायी आयात शुल्क लगाने की अनुमति देता है, यदि देश का व्यापार घाटा (Balance-of-Payments) गंभीर स्थिति में हो।